. निर्दलीय पार्षद अभी तक किसी के पक्ष में नहीं गई
. भाजपा और कांग्रेस के जीते हैं तीन-तीन पार्षद
इस बार महिला के लिए आरक्षित है अध्यक्ष का पद
सुनील ग्रोवर
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
ठियोग नगर परिषद में अध्यक्ष पद को लेकर संशय बरकरार है। सात वार्डों वाली नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस समर्थित तीन-तीन पार्षद जीतकर आए हैं, जबकि भाजपा पृष्ठभूमि के एक निर्दलीय पार्षद के हाथ में सत्ता की चाबी आ गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने पक्ष में बहुमत होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर वार्ड नंबर-चार की पार्षद कुसुम शर्मा के समर्थन पर टिक गई है, जो फिलहाल खुलकर किसी पक्ष में सामने नहीं आई है। नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर दोनों दलों के बीच जोड़-तोड़ और बैठकों का दौर लगातार जारी है। दिनभर ठियोग में राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा रही कि आखिर यह किंगमेकर किसके साथ जाता है और नगर परिषद की सत्ता किसके हाथ लगती है। इस बार नगर परिषद अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित है। चुनाव जीतने वाले सात पार्षदों में पांच महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में महिला अध्यक्ष को लेकर भी राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। दोनों दल अपनी-अपनी समर्थित महिला पार्षद को अध्यक्ष पद तक पहुंचाने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों दल लगातार संपर्क साधने में जुटे हुए हैं और निर्दलीय पार्षद को अपने पक्ष में करने के प्रयास तेज हो गए हैं। कांग्रेस की ओर से यह चुनाव विधायक कुलदीप सिंह राठौर की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के केवल दो वर्ष का कार्यकाल शेष बचा है। ऐसे में कांग्रेस नगर परिषद में अपनी सत्ता स्थापित कर विकास कार्यों को गति देने का संदेश देना चाहती है। वहीं, भाजपा आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए परिषद में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
जनता चाहती है पांच साल की स्थिर सरकार
आम जनता भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। लोगों में पिछले नगर परिषद कार्यकाल को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। जनता का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में तीन बार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बदले गए, जिससे परिषद में कुर्सी का खेल चलता रहा और विकास कार्य प्रभावित हुए। लोगों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता के कारण ठियोग के कई विकास कार्यों पर ब्रेक लगी और नगर परिषद जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार चाहे किसी भी दल का अध्यक्ष बने, लेकिन पूरे पांच वर्षों तक स्थायी नेतृत्व दिया जाना चाहिए, ताकि नगर परिषद बिना राजनीतिक उठापटक के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सके।