पुनर्सीमांकन ने भी बदली रामपुर नगर परिषद की राजनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर नगर परिषद में कांग्रेस का किला भेदने में भाजपा को 38 साल लग गए। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का गढ़ और कांग्रेस समर्थित रही नगर परिषद में करीब चार दशक से भाजपा सत्ता से दूर रही। अब पूर्ण बहुमत के साथ नगर परिषद में काबिज होने जा रही है। नगर परिषद रामपुर में अब तक कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष का एकछत्र राज रहा है। नगर परिषद के नौ वार्डों में इस बार पांच वार्डों में भाजपा समर्थित पार्षदों ने जीत दर्ज की है। रामपुर में 1988 में नगर परिषद बनी थी। नगर परिषद में अब तक कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष की कुर्सी संभाले हुए थे, लेकिन पहली मर्तबा इस बार भाजपा समर्थित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नगर परिषद की बागडोर संभाल सकते हैं। 2020 से पहले नगर परिषद रामपुर के अधिकतर वार्ड मुख्य बाजार रामपुर में ही थे। रामपुर बाजार से चुनाव जीतकर आने वाले प्रत्याशी को ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कमान सौंपी जाती थी। वर्ष 2020 में नगर परिषद क्षेत्र का पुनर्सीमांकन कर चार नए वार्ड बनाए गए, जिससे शहर में वार्डों की संख्या घटी और आसपास के क्षेत्रों में चार नए वार्ड बने। रामपुर में भाजपा की जीत में नए बने वार्डों की अहम भूमिका रही है।
वार्डों के पुनर्सीमांकन ने बदला खेल
इस बार के चुनाव में नगर परिषद के वार्ड नंबर-2, 5, 6, 7 और 8 में भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते हैं। इनमें 6, 7 और 8 नए वार्ड हैं। ऐसे में रामपुर में भाजपा की जीत के लिए वार्डों के पुनर्सीमांकन ने भी अहम भूमिका निभाई है। नगर परिषद में नए बने चार वार्ड विकास की दृष्टि से अभी भी कोसों दूर हैं। इन वार्डों के लोग आज भी बेहतर सड़क, रास्ते, पार्क, पार्किंग, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। अब भाजपा समर्थित नगर परिषद बनने के बाद इन वार्डों में विकास कैसे गति पकड़ेगा, यह आने वाला वक्त ही बता पाएगा। वहीं, नगर परिषद रामपुर के चुनाव के नतीजों से पंचायतीराज चुनावों के भी समीकरण बदल सकते हैं। पंचायत चुनावों से पूर्व नगर परिषद में भाजपा की जीत से भाजपा समर्थित चुनाव प्रत्याशियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।