ग्राउंड रिपोर्ट : दुर्गम बरशील गांव की 220 की आबादी को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए चलना पड़ता है एक घंटा पैदल
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गांव तक जरूरत का सामान पहुंचाना चुनौती, बीमार और बुजुर्ग लोगों को अधिक परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
चिड़गांव (रोहड़ू)। चिड़गांव तहसील के दुर्गम बरशील गांव के लिए आज तक सड़क नहीं बन पाई है। कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन यहां जिंदगी के पांव आज भी पगडंडी पर ही चल रहे हैं। करीब 220 की आबादी वाले इस गांव के ग्रामीणों को पगडंडी के जरिये गहरी खड्ड पर बने पुल को पार कर करीब एक घंटा पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। सड़क सुविधा से वंचित ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और जरूरी सेवाओं के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने में करीब एक घंटा लग जाता है। ऐसे में बीमार और बुजुर्ग लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है। जरूरी सामान गांव तक पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है।सड़क के अभाव में ग्रामीणों को इलाज के लिए मरीजों को पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। विद्यार्थियों और अन्य ग्रामीणों को भी रोजाना आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
मुख्यमंत्री की घोषणा से जगी उम्मीद
दो अक्तूबर को रोहड़ू दाैरे के दाैरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सड़क सुविधा उपलब्ध करवाने की घोषणा की। इसके बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। पूर्व प्रधान पागु राम चौहान सहित बाबू राम, जय लाल, बलवंत, मुंशी राम, सागर सैन, चंदरबीर, हरदेव, जयदेव, जोगिंदर, अमृत, रमेश, जगमोहन, विश्व देव और अन्य ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया। ग्रामीणों ने कहा कि घोषणा से वर्षों पुरानी सड़क की मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है।