. करोड़ों के सेब कारोबार पर मंडराने लगा संकट राकेश बिनी शर्मा निरमंड (कुल्लू)। निरमंड के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले सेब बहुल क्षेत्रों में इस साल सेब बगीचों में पत्ते अधिक और फूल कम निकले हैं। इससे बागवान चिंतित हो गए हैं। मार्च बीतने वाला है, लेकिन निरमंड, अर्सु, बागीपुल और निरमंड में ऐसे सैकड़ों बगीचे हैं, जहां पिंकबड (गुलाबी कली) स्टेज भी शुरू नहीं हो पाई है। करोड़ों के सेब कारोबार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बागवानी विशेषज्ञ इसका कारण चिलिंग ऑवर्स पूरे न होना बता रहे हैं। इसके अलावा बीते साल ज्यादा बारिश, पूर्व में अधिक फसल का होना और सेब पौधों में पुराने स्परों का अधिक होना कारण बता रहे हैं। इस साल ठंड का प्रकोप मार्च तक रहने से गुठलीदार फलों की भी कम सेटिंग हुई है। अधिकतर सेब बगीचों में फ्लॉवरिंग पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि, बगीचों में पर्याप्त मात्रा में नमी है। निरमंड, नित्थर, बागीपुल शार्वी, चायल, बशला और जुआगी समेत अधिकांश स्थानों पर कई सेब बगीचों में यह समस्या है। बागवान विकास शर्मा ने बताया कि इस बार कई बागवानों के बगीचों में फूल कम और पत्ते अधिक निकले हैं। निरमंड के अलावा ऊपरी चायल और जुआगी में भी यह समस्या पेश आई है। बागवानों प्रेम ठाकुर, चंद्रपाल शर्मा, संजीव शर्मा, योगेश, पूर्ण ठाकुर, चंद्रेश ठाकुर, विकास, रोहित और राहुल ने कहा कि उनके बगीचों में इस साल फ्लॉवरिंग पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मौसम के बदलाव के कारण बागवानी संकट में है। फसल प्रभावित होने का डर सता रहा है और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
बीते साल ज्यादा बारिश होने की वजह से समस्या पेश आ रही है। बीते वर्ष समय पूर्व पतझड़ और पूर्व में अत्यधिक फसल इस समस्या का कारण है। ग्लोबल वार्मिंग से भी बागवानी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। बलवीर चौहान, विषय विशेषज्ञ, उद्यान विभाग आनी