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सेब तुड़ान के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

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रोहडू। इस साल सेब सीजन में मजदूरों की भारी कमी बागवानों के लिए मुसीबत बन गई है। सेब तुड़ान से पहले मजदूरों की तलाश में उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार के बाद बागवान अब नेपाल तक पहुंच रहे हैं। मजदूरों की इस साल कमी पूरी नहीं हुई तो सेब समय पर मंडियों में पहुंचाने में मुश्किल होने वाली है। इस बार नेपाल से मजदूर बहुत कम संख्या में पहुंच रहे हैं।
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सेब तुड़ान का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, मजदूरों की कमी के कारण बागवानों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। नेपाली ठेकेदार पूर्ण बहादुर बताते हैं कि नेपाल में कंपनी के काम बढ़ रहे हैं। मजदूरों को इंडिया के बराबर मजदूरी अब घर के नजदीक मिल रही है। कुछ मजदूर विदेशों की तरफ जा रहे हैं। इसलिए यहां सेब सीजन के लिए मजदूर नेपाल से कम पहुंच रहे हैं। सेब बाहुल क्षेत्र में हर बागवान के पास सीजन के दौरान दस से पचास तक मजदूरों की जरूरत रहती है। पौधों से फल तुड़ान के बाद पैकिंग व सड़क तक पहुंचाने में मजदूरों की जरूरत रहती है। सेब सीजन के लिए अधिकांश मजदूर अभी तक नेपाल से ही पहुंचते थे। क्षेत्र के बागवान राज कुमार, सुरेंद्र चौहान, संदेश कुमार ने बताया कि दस दिन पहले तक हर साल आने वाले मजदूरों का इंतजार हो रहा था। दस दिन पहले फोन पर जवाब मिला कि इस बार सेब सीजन के लिए नेपाल से पुराने मजदूर आने को तैयार नहीं है। उसके बाद चार दिन से हरिद्वार में मजदूरों के लिए भटकते रहे। हरिद्वार में रोहडू, चौपाल, जुब्बल, कोटखाई सहित सेब बाहुल क्षेत्र के करीब चार से पांच सौ बागवान कई दिनों से डेरा डाले हुए हैं। कुछ खाली लौट रहे तो कुछ नहीं पहुंच रहे हैं। रात के समय नेपाल की सीमा से आने वाली हर बस में मजदूरों की तलाश की जा रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ कहते हैं कि भविष्य में बागवानी के लिए मजदूरों की कमी एक बड़ी समस्या बनने वाली है। अब बागवानों को विदेशी तर्ज पर मशीनों की तकनीक से खेती व बागवानी के लिए तैयार होना पडे़गा। मशीनों से कम मजदूरों के साथ बागवानी को अपनाना जरूरी हो गया है। खास पर सेब के लिए मजदूरों की अधिक जरूरत रहती है।
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