संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई ( रोहड़ू)। सेब बहुल क्षेत्र में युवाओं की रगों में चिट्टा और बगीचों में जल रहा छिट्टा (टहनियां) सांसों के लिए संकट बन गया है। सेब बहुल क्षेत्र में चिट्टा युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। यह नशा युवाओं की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षमता को खत्म कर रहा है। वहीं, सेब के बगीचों में छिट्टा यानी सेब के पौधों की काट-छांट से निकलने वाली टहनियों के जलाने का सिलसिला नहीं थम रहा। इससे उठने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। नवंबर से मार्च तक बागवान बगीचों में काट-छांट का कार्य करते हैं। इस दौरान कई बागवान अपशिष्ट को बगीचे में ही जलाते हैं। हालांकि, प्रशासन ने बगीचों में अपशिष्ट जलाने पर रोक लगाई है। इसके बावजूद कुछ बागवान बगीचों में आग लगा रहे हैं। इससे वातावरण तो प्रदूषित हो रहा है, वहीं कई बार आग घासनियों और घरों को अपनी चपेट में ले लेती है।
वहीं, बुद्धिजीवी लोगों का मानना है कि चिट्टे से इंसान की नस्लें खत्म हो रही हैं, तो छिट्टा जलाने का सिलसिला बागवानी को ले डूबेगा। दोनों ही स्थितियां भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक हैं। अब जरूरत है कि सरकार, प्रशासन और आम जनता इस गंभीर समस्या को समझें और मिलकर ठोस कदम उठाएं। हालांकि, चिट्टे के खिलाफ सरकार ने जीरो टालरेंस नीति शुरू की है, लेकिन लोगों का कहना है कि अब धुएं को रोकने के लिए भी सरकार को बड़ी पहल करने की जरूरत है। युवाओं और बागवानों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएं। यदि अब नहीं जागे, तो फिर कभी नहीं जाग पाएंगे।
बागवानों की ओर से फैलाया जा रहा प्रदूषण को लेकर संबंधित विभागों के साथ जल्द बैठक बुलाई जाएगी। नशा और आग से उठा रहा धुआं दोनों को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे ।
अभिषेक बरवाल, एसडीएम कोटखाई