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Rampur Bushahar News: तेज धूप से कुम्हलाने लगी उम्मीद, पेपरी बार्क केंकर की चपेट में सेब के बगीचे

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नोग वैली क्षेत्र में पेपरी बार्क केंकर की चपेट में आए सेब के पेड़। संवाद
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. नोगवैली और आसपास के सेब बहुल क्षेत्रों में सन बर्न से बढ़ी बागवानों की चिंता
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. विशेषज्ञों ने चूना और पेस्ट लगाने की बागवानों को दी सलाह
. टीएसओ का छिड़काव कर चुके बागवान पेस्ट लगाने से करें परहेज
गुलजारी लाल डमालू
डंसा (रामपुर बुशहर)।
रामपुर उपमंडल के तहत आने वाली नोगवैली और साथ लगते सेब बहुल क्षेत्रों में लगातार सूखे के चलते सेब के बगीचे पेपरी बार्क केंकर की चपेट में आने लगे हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने सन बर्न को इसका मुख्य कारण बताया है। इस तरह के मामले अधिकतर वहां पेश आ रहे हैं, जहां सुबह से शाम तेज धूप रहती है। सेब के पेड़ों में लगातार बढ़ रहे इस रोग से बागवानों चिंता बढ़ गई है। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण सूखे की मार लगातार बढ़ती जा रही है। बर्फबारी, बारिश न होने के चलते जमीन से नमी गायब हो गई है। ऐसे में सेब के पौधों की टहनियों से खाल उतरने से बागवान खासे परेशान हैं। बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्तूबर और अप्रैल में बगीचों में चूना और पेस्ट लगाना बागवानी के लिए फायदेमंद रहता है, लेकिन इस बार मौसम में बदलाव के चलते मार्च में तने में पेस्ट लगाना उपयुक्त रहेगा। बागवानों को चाहिए कि सेब के तने और टहनियों से उतर रही खाल को खुरचने के बाद चूना और पेस्ट लगाने का काम पूरा करें, ताकि सेब के पौधों को सन बर्न से बचाने में मदद मिल सके। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जिन बागवानों ने टीएसओ या अन्य छिड़काव पहले करवा दिया है, उन्हें पेस्ट लगाने से परहेज करना होगा, क्योंकि आजकल तेज धूप के चलते बगीचों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। मौसम में बदलाव के चलते बागवान आजकल किसी भी तरह का छिड़काव बगीचों में न करें। बारिश होने के बाद ही रुटीन के मुताबिक छिड़काव संभव है।
हर साल प्रभावित होती है बागवानी
क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान पवन कुमार, सुंदर सिंह, लायक राम, बंसी लाल, सूरज, नरेंद्र, राज मेहता, भूषण कुमार, सुरेंद्र, बिहारी लाल, अमित सहित सैकड़ों बागवानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से हर साल बागवानों को जूझना पड़ता है, लेकिन सरकार की ओर से नुकसान की क्षतिपूर्ति फाइलों तक ही सिमट कर रह जाती है। प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की बेरुखी के चलते करोड़ों की बागवानी हर साल प्रभावित होती है।
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रामपुर की नोगवैली और आसपास के क्षेत्रों सन बर्न के कारण सेब के पेड़ों में तेज धूप के चलते तने और टहनियों से खाल उतरने का खतरा रहता है। इस वजह से पेपरी बार्क केंकर की चपेट में सेब के पेड़ आ जाते हैं। बागवानों को सलाह दी है कि प्रभावित तने और टहनियों की खाल को साफ करने के बाद चूना और पेस्ट लगाएं, ताकि सेब के पेड़ों को रोगों से बचाया जा सके। - डॉ. संजय चौहान,
विषयवाद विशेषज्ञ, बागवानी विभाग, रामपुर
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