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Rampur Bushahar News: नर्सरी एक्ट लागू फिर भी कश्मीर से हिमाचल पहुंच रहे सेब के पौधे

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बैरियरों में लापरवाही पर उठे सवाल, कानून की धज्जियां उड़ाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश नर्सरी एक्ट-2015 लागू होने के बावजूद कश्मीर से सेब के पौधों से भरे दर्जनों ट्रक लगातार हिमाचल में प्रवेश कर रहे हैं। इससे न केवल राज्य के कानून की खुलेआम अवहेलना हो रही है, बल्कि सेब की खेती पर रोग फैलने और जैविक सुरक्षा को खतरा भी बढ़ता जा रहा है। एक्ट में नियम स्पष्ट होने के बावजूद बैरियरों पर तैनात संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। नर्सरी एक्ट के तहत बाहरी राज्यों से बिना अनुमति, बिना प्रमाणित दस्तावेजों और बिना पंजीकरण के पौधे लाना गैरकानूनी है। कानून में प्रावधान है कि अवैध तरीके से लाए गए पौधों को मौके पर ही नष्ट किया जाएगा और संबंधित व्यक्ति पर दस हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं यदि कोई व्यक्ति दोबारा पकड़ा जाता है तो उसे भविष्य में वैध तरीके से भी पौधे लाने की अनुमति नहीं मिलेगी। बावजूद इसके कश्मीर से आने वाले ट्रक बैरियरों को पार कर बागवानों तक पहुंच रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में कई बैरियरों से 20 से अधिक ट्रक बिना ठोस जांच के गुजर चुके हैं। इन ट्रकों में हजारों पौधे होने की आशंका है। बागवानी विशेषज्ञों मानते हैं कि बाहरी राज्यों से आने वाले पौधों में स्कैब, फायर ब्लाइट और अन्य संक्रामक रोग फैलने का खतरा रहता है, जिससे हिमाचल के सेब उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है। राज्य में सेब से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका दांव पर है।
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गौर हो कि सेब बाहुल क्षेत्र में कश्मीर से पहुंच चुके करीब एक लाख पौधोंं को उद्यान विभाग लोगों की शिकायत के बाद पकड़ चुका है। एक ही दिन रोहड़ू में 50 हजार सेब के पौधे कश्मीर से लाए गए थे जिन्हें पकड़ लिया गया है।
कोटस
हर साल इन दिनों में बाहर से आने वाले पौधों को पकड़ना चुनौती बन रहा है। कई स्थानीय लोगों का भी हाथ इसमें रहता है। सूचना के बाद विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता है। पिछले साल हजारों पौधे जलाए गए थे। इस बार भी पचास हजार पौधे एक दिन में पकड़े गए हैं। बागवानों के सहयोग की भी जरूरत है। वे बिना बिल पौधे न खरीदें। - यशवंत बगींटा, उद्यान विकास अधिकारी रोहड़ू
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सभी बैरियरों पर 24 घंटे कड़ी निगरानी हो, सीसीटीवी व्यवस्था मजबूत की जाए और प्रत्येक ट्रक की दस्तावेजी जांच अनिवार्य की जाए। जब कानून में स्पष्ट दंड का प्रावधान है, तो फिर अवैध पौधों की खेप कैसे लगातार प्रदेश में पहुंच रही है। यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो यह लापरवाही हिमाचल की बागवानी अर्थव्यवस्था के लिए भारी नुकसान साबित हो सकती है। - हरीश चौहान, संयोजक संयुक्त किसान मंच
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