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Rampur Bushahar News: एफटीए और एमआईएस में बदलाव पर सेब उत्पादक संघ ने जताई चिंता

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जुब्बल में बैठक के दौरान सेब उत्पादक संघ के पदाधिकारी। 
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जुब्बल में बैठक सस्ते आयातित सेब से बागवानों की आजीविका पर संकट की आशंका, 22 जुलाई को प्रदर्शन का ऐलान
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। हिमाचल सेब उत्पादक संघ की जुब्बल ब्लॉक कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को जुब्बल में हुई। बैठक में प्रदेश के बागवानों के सामने खड़े कृषि और बागवानी संबंधी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यकारिणी ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) तथा मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) में किए जा रहे बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
वक्ताओं ने कहा कि यदि एफटीए लागू होता है तो अमेरिका से आयातित सेब और अन्य कृषि उत्पाद सस्ते दामों पर बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। इससे हिमाचल के सेब उत्पादकों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में कठिनाई होगी और उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है।
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कार्यकारिणी ने मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) को कमजोर किए जाने का भी विरोध किया। संघ का आरोप है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में इस योजना का बजट समाप्त कर दिया था और अब राज्य सरकार भी इससे पीछे हट रही है। उनका कहना है कि इस वर्ष नई शर्तें लागू करने के साथ डिपुओं और बोरियों की संख्या में कटौती की गई है, जिससे बागवानों की समस्याएं और बढ़ेंगी।
बैठक में सेब के बगीचों में बढ़ रही असामयिक पतझड़ और अन्य बीमारियों पर भी चिंता व्यक्त की गई। संघ ने आरोप लगाया कि बागवानी विभाग और संबंधित विश्वविद्यालय इन समस्याओं के प्रभावी समाधान देने में सफल नहीं रहे हैं। साथ ही सरकारी सहायता और सब्सिडी में कमी तथा विभागों में आवश्यक स्प्रे दवाइयों की उपलब्धता न होने के कारण बागवानों को बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बैठक में संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने और अधिक से अधिक बागवानों को जोड़ने का निर्णय लिया गया। संघ ने घोषणा की कि 22 जुलाई को जुब्बल में प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के विरोध में राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा 25 जुलाई को शिमला में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में जुब्बल ब्लॉक से करीब 10 प्रतिनिधि भाग लेंगे।
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संघ के अध्यक्ष संजय चौहान ने कहा कि यदि बागवानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन आजीविका और अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जनसंघर्ष शुरू करेगा।
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