सेब के बगीचों में फैल रहा अलटरनेरिया के संक्रमण के धब्बे
हर साल जून के अंत और जुलाई के पहले सप्ताह में फैलता है संक्रमण, हवा में अधिक नमी आने पर होता है शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचों में इस साल अल्टरनेरिया के संक्रमण ने दस्तक दे दी है, जिससे समय से पहले पतझड़ की आशंका बढ़ गई है। अल्टरनेरिया के संक्रमण को फैलता देख कम और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बागवान चिंतित हैं। इस साल मौसम के लगातार बदलाव के कारण बागवानों के लिए फसल को सीजन तक प्राकृतिक आपदा और बीमारियों के प्रकोप से बचाना चुनौती बन गया है। बागवानी विशेषज्ञों ने बगीचों में अल्टरनेरिया के संक्रमण को समय पर रोकने की सलाह दी है। सेब के बगीचों में हर साल जून के अंत और जुलाई के पहले सप्ताह में अल्टरनेरिया का संक्रमण हवा में अधिक नमी आने पर शुरू होता था। इस बार अभी से इसके लक्षण नजर आने लगे हैं। बागवान अजय आजाद ने बताया कि दो दिन पहले कई पत्तों पर काले धब्बे नजर आए। जब गंभीरता से जांच की, तो अल्टरनेरिया का संक्रमण मिला। उसके बाद रोकथाम के लिए दवाइयां का छिड़काव शुरू कर दिया है। बागवान सुरेंद्र चौहान ने बताया कि उनके बगीचे में भी कई पौधों में बारिश के बाद पत्तों पर काले धब्बे आने शुरू हो गए हैं, इसलिए इसके रोकथाम के उपाय शुरू कर दिए हैं।
रोग के लक्षण
अल्टरनेरिया संक्रमण के लक्षण छाया और अधिक नमी वाले बगीचों में अधिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं। शुरुआती चरण में रोग सेब की पत्तियों पर दिखाई देता है। रोग से ग्रस्त पत्तियों की ऊपरी सतह पर गोलाकार गहरे हरे रंग के धब्बे नजर आते हैं। यह हरे धब्बे पहले भूरे और फिर गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं। पत्तियों का शेष भाग पीले रंग का होता जाता है। रोग के पनपने से समय से पूर्व ही पतझड़ होता है, जिससे फलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। संक्रमित फलों पर भी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। फलों का विकास भी रुक जाता है।
बगीचों में अल्टरनेरिया रोग फैलना आरंभ हो गया है। यह रोग सेब के लिए बहुत घातक है। समय पर उपचार नहीं किया गया, तो सेब तुड़ान से पहले ही सेब के पौधे से पत्तियां झड़ जाएंगी। फल भी पूरी तरह से खराब हो जाएगा। इसका असर अगले साल की पैदावार पर भी पड़ता है।
- डॉ. संजय चौहान, विषयवाद विशेषज्ञ, उद्यान विभाग