एसडीएम रामपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते किसान संघर्ष समिति के सदस्य।
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। किसान संघर्ष समिति ने बुधवार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने और बिजली संशोधन विधेयक 2020 को वापस लेने की मांग की है। समिति ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर दिल्ली में चल रहा आंदोलन जायज है। इस संबंध में समिति के सदस्यों ने तहसीलदार ननखड़ी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन के माध्यम से समिति ने केंद्र सरकार की ओर से पारित तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने और किसानों-बागवानों की समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रदेश सरकार से मांग की। समिति ने विद्युत संशोधन अधिनियम 2020 को तुरंत वापस लेने और राज्य सरकार के 2014 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हिमाचल की जनता से किए गए वादों के अनुसार प्रदेश के उत्पादों सब्जियों, फूल, मसालों, ऊन, दूध, शहद आदि पर डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक समर्थन मूल्य की घोषणा करने की मांग की है। साथ ही समिति ने किसानों-बागवानों के खरीदारों और आढ़तियों के पास फंसे पैसों का भुगतान तुरंत करवाने और दोषी खरीदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई। वहीं, किसानों-बागवानों को विभाग से मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने के निर्णय को तुरंत वापस लेने, एचपीएमसी और हिमफेड की ओर से बागवानों से खरीदे सेब का बकाया भुगतान तुरंत नकद में करने की मांग की। किसान संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मक्की सहित फलों और सब्जियों के लिए सरकारी क्षेत्र में भंडारण केंद्र, शीत भंडारण केंद्र और प्रसंस्करण इकाइयों का निर्माण करने की भी वकालत की। इस अवसर पर राजिंद्र सिंह, कपूर सिंह और राजन मेहता सहित अन्य मौजूद रहे। राष्ट्रीय किसान दिवस के मौके पर किसान संघर्ष समिति ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार देश के किसानों की मांगों पर केवल विचार न करे, बल्कि उन्हें माने। वहीं, राज्य सरकार प्रदेश के किसानों और फल सब्जी उत्पादकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त मांगों पर उचित फैसला ले।