रासायनिक खेती को छोड़ कर अपना रहे प्राकृतिक बागवानी तकनीक
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कम बर्फबारी ने बढ़ाई चिंता, फ्लॉवरिंग के समय हो सकती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)। उपमंडल निरमंड के बागवान रासायनिक खेती की जगह आत्मा परियोजना की ओर से सुझाई जा रही प्राकृतिक बागवानी तकनीक को अपना रहे हैं। क्षेत्र के बागवान प्राकृतिक रूप से खुद सेब के पेड़ों के लिए तना पेस्ट तैयार कर रहे हैं। इन दिनों सेब के पेड़ों में प्राकृतिक रूप से तैयार किया गया पेस्ट लगाया जा रहा है। बिना रसायन के सेब के पौधों के लिए लिए तना पेस्ट बनाने के लिए एक ड्रम में 10 लीटर पानी, 20 लीटर गोमूत्र और 20 किलो गोबर डालें। इसके बाद दरेक या अन्य उपलब्ध पेड़ों के 10 किलो पत्तों को पिसकर डालें। साथ ही हल्दी 250 ग्राम, हींग पाउडर 40 ग्राम, चिकनी मिट्टी 2.5 किलोग्राम, एक लीटर अलसी के तेल के मिश्रण को आपस में मिलाएं और ड्रम को 24 घंटे के लिए जूट की बोरी से ढककर रखें। इसके बाद पेस्ट बनाकर तैयार हो जाएगा, जिसे बागवान अपने पेड़ों में लगाएं। मौसम की बेरुखी ने बागवानों की परेशानी बढ़ा दी है। कम बर्फबारी और बारिश के कारण बागवानों को फ्लॉवरिंग के समय मौसम के सताने की चिंता बढ़ गई है। इससे फसल प्रभावित होने का डर बना हुआ है। बीते माह हुई बर्फबारी महज दो सप्ताह में ही पिघल गई। यहां तक कि कई जगह एक सप्ताह से भी कम समय में बर्फ पिघल गई। वहीं, निचले इलाकों में पर्याप्त बारिश न होने के कारण जमीन से नमी गायब होती जा रही है। स्टोन फ्रूट के लिए इन दिनों बारिश होना अति आवश्यक है। फ्लावरिंग के समय में मौसम जमकर बरसने के संकेत मिल रहे हैं। वर्तमान में समय से पहले ही तापमान में बढ़ोतरी होने के कारण निरमंड के अधिकांश क्षेत्रों के बागवान अब अपने सेब बगीचे के कार्यों में तेजी से जुटे हुए हैं। बागवान सेब बगीचों में टीएसओ, एचएमओ ऑयल की स्प्रे और बोडोमिक्चर, खाद, गोबर छिड़काव के कार्यों में जुट गए हैं।
रासायनिक खेती से जमीन और पेड़ों दोनों को नुकसान
कृषि विभाग निरमंड के खंड तकनीकी प्रबंधक संजय और सहायक तकनीकी प्रबंधक अनिल का कहना है कि रासायनिक खेती से जमीन और पेड़ों दोनों को नुकसान पहुंचता है। पर्यावरण में भी रसायन के कारण विषैले तत्व घुल रहे हैं। सरकार की ओर से प्राकृतिक खेती करने के उद्देश्य से किसानों और बागवानों के लिए कई योजनाएं शामिल हैं, जिस पर विशेष अनुदान का प्रावधान भी है। प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए निरमंड खंड में विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से रसायन छोड़ प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया है।