वूली एफिड का बढ़ रहा है संक्रमण
सेब के पेड़ों और फसल को पहुंच रहा नुकसान
सेब तुड़ान के बाद पेड़ों पर छिड़कें कीटनाशक
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। सेब के बगीचों में वूली एफिड का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। बगीचों में वूली एफिड परजीवी कीट के हमले से पौधों और फसल को भारी नुकसान हो रहा है। मौसम में बदलाव के बाद भी बगीचों में कीट का हमला कम नहीं हो रहा है। सेब उत्पादक क्षेत्र के अधिकांश बगीचों में इस बार वूली एफिड तेजी से फैलने की सूचनाएं मिल रही हैं। वूली एफिड के हमले से सेब के पौधों की खाल खराब हो रही है। पत्तियों और अगले साल के लिए तैयार होने वाले बीमे को नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों ने वूली एफिड के संक्रमण की कई स्थानों से सूचना मिलने की पुष्टी की है।
क्या है वूली एफिड
सेब की टहनियों में रूई या बर्फ के फाहे की तरह सफेद पदार्थ जमा हुआ वूली एफिड होता है। इसके अंदर गहरे लाल और भूरे रंग के छोटे-छोटे कीड़े जमा होते हैं। वूली एफिड कीट पेड़ की छाल, तना और शाखाओं का रस चूसता है। इससे पौधे में गांठें बनती हैं। सर्दियों में कीट जड़ों में पहुंच जाता है। सर्दियों में कीट पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इससे पौधे का विकास रुकता है। बीमें क्षतिग्रस्त होने से फल लगने की क्षमता कम हो जाती है।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ के अनुसार वूली एफिड कीट पैदा होने के 24 घंटे में सफेद रूई की तरह का पदार्थ छोड़ते हैं। कीट इसके सुरक्षा चक्र में बचा रहता है। इसकी रोकथाम के लिए रासायनिक प्रबंधन उचित तरीका है। उन्होंने सलाह दी है कि सेब तुड़ान के तुरंत बाद बागवान रोकथाम के लिए रसायन का छिड़काव विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें। सेब की कांटछांट के दौरान वूली एफिड से क्षतिग्रस्त टहनियों को हटा दें। सर्दियों में कीट का जड़ों में उपचार करें। सेब की फसल का तुड़ान पूरा होने तक बीमारी के कीट को रोकने के लिए कीटनाशक की सिफारिश नहीं की जा सकती। सेब तुड़ान के बाद बागवान विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार वूली एफिड को रोकने के लिए छिड़काव कर सकते हैं।