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दर्जा ही बढ़ाया, सुविधाएं नहीं

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नेरवा (रोहड़ू)। सिविल अस्पताल नेरवा में चिकित्सकों सहित पैरा मेडिकल स्टाफ के पद खाली चल रहे हैं। पूर्व सरकार ने अस्पताल का दर्जा बढ़ाया। लेकिन यहां पर लोगों को सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा रही है। स्तरोन्नत होने के साढ़े तीन वर्ष बाद भी अस्पताल पुराने ढर्रे पर चल रहा है। 50 बिस्तर का दर्जा मिलने के बावजूद अस्पताल में मात्र छह बिस्तर की ही सुविधा है। अस्पताल को सुविधाओं के नाम पर आज तक मात्र आश्वासन ही मिले हैं।
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उपमंडल का केंद्र बिंदु होने के कारण अस्पताल में नेरवा की 22 पंचायतों के अलावा चौपाल व कुपवी की करीब डेढ़ दर्जन पंचायतों सहित उत्तराखंड के अटाल से भी लोग इलाज करवाने यहां आते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 26 जून 2014 को नेरवा अस्पताल को स्तरोन्नत कर सिविल अस्पताल का दर्जा दिया था। अस्पताल में बिस्तरों की क्षमता 50 की गई थी। लेकिन यह दर्जा घोषणा तक सीमित रहा। अस्पताल में एमबीबीएस चिकित्सक के तीन, दंत चिकित्सक का एक, ऑप्थाल्मिक अफसर का एक, नर्सों के छह, फार्मासिस्ट का एक व तकनीशियन का एक पद काफी समय से खाली पड़ा हुआ है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक व रेडियोग्राफर का पद भी खाली है। इससे अल्ट्रासाउंड व एक्सरे मशीन लंबे समय से धूल फांक रही है। अस्पताल में रात को ड्यूटी देने वाले चिकित्सक के लिए ड्यूटी रूम तक की व्यवस्था नहीं है। सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण क्षेत्रवासियों को इलाज के लिए शिमला जाना पड़ रहा है। लचर स्वास्थ्य सेवाएं के प्रति लोगों में भी भारी रोष है।
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