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परियोजना प्रभावित क्षेत्र में शामिल हो चुंजा गांव

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परियोजना प्रभावित क्षेत्र में शामिल हो चुंजा गांव
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लूहरी परियोजना की जन सुनवाई में जनप्रतिनिधियों ने उठाई मांग
ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर आपत्तियां दर्ज करवाईं
चेताया, मांग पूरी होने तक जारी रहेगा विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। लूहरी परियोजना के प्रथम चरण में बनने वाली 210 मेगावाट विद्युत परियोजना में देलठ पंचायत के चुंजा गांव को प्रभावित क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण ग्रामीणों में प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के प्रति खासा रोष है। सोमवार को लूहरी विद्युत परियोजना के निर्माण को लेकर हुई जन सुनवाई में देलठ पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने चुंजा गांव को प्रभावितों की श्रेणी में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं होता है तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर चुंजा गांव के ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं। गौरतलब है कि नीरथ पटवार सर्कल के तहत चुंजा गांव को प्रभावित क्षेत्र से बाहर किया गया है, जबकि यह गांव परियोजना के बांध स्थल से 100 मीटर की दूरी पर स्थित है, बावजूद इसके इस गांव को दरकिनार कर साथ लगते क्षेत्रों को शामिल किया गया है। गांव के बागवान आजीविका के लिए फल उत्पादन पर ही निर्भर हैं और परियोजना निर्माण से इन बगीचे भी प्रभावित होंगे। ग्रामीणों ने चेताया कि जब तक चुंजा गांव को प्रभावित क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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देलठ पंचायत उप प्रधान सतपाल सिंह, रामदास, दुला राम, दर्शन दास, संदीप कुमार, सिमू राम, राजेंद्र भगेट, महेंद्र सिंह, बिहारी लाल, उदय सिंह, केदार सिंह, अशोक कुमार, नरेश कुमार, अशोक कपूर, अनिल कुमार, राजू भगेट, दुर्गा सिंह, दीपेंद्र नलवा, रक्षा देवी, सुभद्रा देवी, अशोक वर्मा, संजीव कुमार, संतोष कुमार, रंजीत कुमार, प्यारे लाल, वीर सिंह, संजीव कुमार और राजपाल सहित अन्य ग्रामीणों के अनुसार बांध स्थल से सौ मीटर दूरी पर स्थित चुंजा गांव को प्रभावित क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया है, वहीं साथ लगते कुल्लू जिले की दो पंचायतों देहरा और नित्थर को शामिल किया गया है। उन्होंने बांध स्थल को केंद्र बिंदू मानते हुए देलठ पंचायत को भी प्रभावितों की श्रेणी में लाने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं होता तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इससे पूर्व भी यह मामला सरकार, प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से उठाया गया है, लेकिन अभी तक क्षेत्र के लोगों को राहत नहीं मिली है।
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