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मानदेय बढ़ौतरी न करने को लेकर मिड डे मील वर्कर्स तल्ख

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मानदेय बढ़ोतरी न करने पर खोला मोर्चा
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मिड डे मील वर्करों ने एसडीएम के माध्यम से मोदी को भेजा ज्ञापन
वर्करों को न्यूनतम 6750 रुपये वेतन प्रतिमाह दिए जाने की मांग
कहा - 1000 रुपये प्रतिमाह में जीवनयापन करना हुआ मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू मानदेय बढ़ोतरी को लेकर तल्ख हो गई है। बीते लंबे समय से मांगों के लिए लड़ाई लड़ रहे सदस्यों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया है। सोमवार को रामपुर, सराहन, कुमारसैन और ननखड़ी ब्लॉक इकाई का प्रतिनिधिमंडल ने सीटू क्षेत्रीय कमेटी रामपुर महासचिव कुलदीप और अध्यक्ष राम दास की अध्यक्षता में एसडीएम रामपुर नरेंद्र चौहान के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में यूनियन ने कहा कि कुपोषण दूर करने मे मिड डे मील वर्कर्स मुख्य भूमिका निभा रहे हैं लेकिन उनकी मांगों पर कोई गौर नहीं किया जा रहा है। यूनियन ने प्रधानमंत्री व भाजपा की केंद्र सरकार से मांग की है कि मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में तुरंत बढ़ोतरी करें। वर्करों को न्यूनतम 6750 रुपये वेतन प्रतिमाह दिया जाए। मिड डे मील योजना को एनजीओ को न दिया जाए। हरियाणा के तर्ज पर 12 माह का वेतन दिया जाए। प्रत्येक स्कूल में 2 मिड डे मील वर्कर की नियुक्ति की जाए। जहां एक वर्कर है, उसके साथ हेल्पर की व्यवस्था की जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की शर्तें लागू करना और 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए, स्कूलों को बंद न किया जाए।
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यूनियन ने कहा कि देश में चल रही मिड डे मील योजना में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 8वीं कक्षा तक के 10 करोड़ बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। करीब 12 लाख स्कूलों में इस कार्य को करने के लिए इस योजना में लगभग 25 लाख कुक और हेल्पर लगे हैं, जिनमें 95 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो गरीब तबके और विधवा महिलाएं हैं। बावजूद इसके इन्हें मात्र 1000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है, जो केवल वर्ष में 10 महीने ही मिलता है। इस मौके पर आशु भारती, कौशल्या, मीना, सुधीरा, संध्या, संगीता, शकुंतला, निर्मला, तीर्था और सोनम सहित अन्य मौजूद रहे।
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