रामपुर बुशहर। राज्य में सूखे ने सेब बगीचों के प्रबंधन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दी है। बागवानों ने सेब के पेड़ों की काट-छांट का काम पूरा कर लिया है। लेकिन उनको बगीचों में खाद डालने का मौका तक नहीं मिल रहा। सेब उत्पादकों ने पेड़ों की प्रूूनिंग तो कर ली है पर सूखे के कारण बगीचों का प्रबंधन रुक गया है। ऐसी स्थिति में बागवान बारिश और बर्फबारी के लिए मौसम पर टकटकी लगाए हैं।
सितंबर के बाद से बागवानों को नाममत्र की बारिश और बर्फबारी मिली है। इससे उनके बगीचों में नमी जरूरत के अनुसार पैदा नहीं हुई है। नमी न होने के कारण बागवानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। दलोग गांव के प्रगतिशील बागवान इंद्रजीत, ननखड़ी के सतीश, राजपुरा के राधाकृष्ण, कमलाऊ से प्रेम राज, देलठ से राजेंद्र, सराहन से विनोद, राजीव, दुर्गा प्रसाद कहते हैं कि उन्होंने सेब और अन्य फलदार पेड़ों की प्रूनिंग समय रहते पूरी कर ली थी। लेकिन बगीचों में तौलिये बनाने का काम रुक गया है। बगीचों में तौलिये तभी बनेंगे, जब बारिश और बर्फबारी उपयुक्त मात्रा में होगी। लंबे समय से उनके इलाकों में बारिश और बर्फबारी न होने से बगीचों के उचित प्रबंधन में संकट खड़ा हो गया है। इन बागवानों का कहना है कि पिछले साल बगीचों के प्रबंधन के लिए समय पर बर्फबारी और बारिश होने से बगीचों में खाद डाली जा सकी थी। पिछले साल बगीचों के प्रबंधन में कोई समस्या नहीं आई थी। इस बार नमी न होने से मुश्किल खड़ी हो गई है।
सूखे में न बनाएं तौलिये : भारद्वाज
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि बागवानों को इस साल प्रूनिंग के लिए सही तापमान और कड़ाके की ठंड मिल गई है। लेकिन सूखे के कारण बागवानों को अभी बगीचों में तौलिये बनाने का काम नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे बगीचे की मिट्टी और सूख जाती है। बागवानों को चाहिए वे बगीचों में तौलिये तब तक न बनाएं, जब तक बर्फबारी और बारिश उचित मात्रा में न पड़े। साथ ही बगीचों में खाद डालने का काम भी न करें। बारिश और बर्फबारी के तुरंत बाद बगीचों में कीचड़ रहते हुए भी खाद डालने से समस्या पैदा होगी। बगीचों में कीचड़ कम होने का इंतजार करने के बाद ही तौलिये बनाएं और खाद डालें।