रामपुर बुशहर। प्रदेश भर में सेवाएं दे रहे करीब 6300 जलरक्षकों में स्थायी नीति न बनने से रोष है। कैबिनेट में 27 सितंबर को जलरक्षकों का मानदेय 1700 से बढ़ाकर 2500 रुपये किया गया था। इसके अलावा जलरक्षकों को स्थायी नीति बनाने के लिए भी मंजूरी मिली थी। लेकिन इस निर्णय की अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हो पाई है, जिससे प्रदेश के हजारों जलरक्षकों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है।
जलरक्षकों को बीते नौ माह से मानदेय नहीं मिल पाया है। उन्होंने जल्द मानदेय नहीं मिलने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया है। हिमाचल प्रदेश जलरक्षक यूनियन मंडल रामपुर की बैठक मंगलवार को अध्यक्ष राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान जलरक्षकों के विभिन्न मुद्दों और मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्य करने की समय सीमा के संबंध में अधिशासी अभियंता रामपुर से जलरक्षकों ने लिखित ब्यौरा लेने का आग्रह किया। अध्यक्ष ने कहा कि जलरक्षक प्रतिदिन जल स्रोतों की देखरेख और पेयजल स्टोर टैंकों की साफ-सफाई और जल भंडारण करते हैं। अधिकतर क्षेत्रों में विभाग के फिटर की कमी के चलते उनका काम भी जलरक्षक कर रहे। बावजूद इसके जलरक्षकों को बीते नौ माह से मानदेय की अदायगी नहीं हो पाई है। इस दौरान यूनियन के उपाध्यक्ष मुकुंद लाल, सिंघी राम, धर्मपाल मल्होत्रा, संदीप कुमार नेगी, राजकुमार, रूप सिंह, राजकमल जिष्टू, राकेश कुमार, अरविंद कुमार, राजेंद्र कुमार, डिंपल नेगी, कपिल देव, ललित मोहन, प्रकाश चंद, रिंकू राम, ईश्वर लाल, राजू राम, भजन दास, रमेश कुमार, महेंद्र सिंह, हरबंस लाल, यशवंत कुमार, लायक राम, भगवान दास, मनोज कुमार, दलीप कुमार, यशपाल और अन्य सदस्य मौजूद रहे।