अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। इन दिनों सेब के पौधे सूखे की मार झेल रहे हैं। इसके चलते बगीचों में तोलिए बनाने का काम करना बागवानों के लिए मुश्किल हो गया है। बागवानी विशेषज्ञ भी सूखे में तोलिए न करने की सलाह दी है। इससे सेब की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही सेब के बगीचों में बागवानों ने कार्य शुरू कर दिया है। बर्फबारी होने से पहले बगीचों का कार्य निपटाना जरूरी रहता है। बागवान इन दिनों सेब की काट-छांट और तोलिए बनाने के कार्य में जुटे हैं। सूखे के चलते पौधे के चारों ओर खोद कर तोलिये बनाना मुश्किल हो गया है।
तोलिए बनाने के लिए ये सबसे उपयुक्त समय है। इन दिनों बागवान पौधों की जड़ों को साफ करने का कार्य भी करते हैं। ताकि पौधों की जड़ों को बोरर कीट से बचाया जा सके। इसी कारण कई बागवान सूखे में ही सख्त मिट्टी को खोदकर तोलिए बनाने का कार्य कर रहे हैं। लेकिन सूखे में तोलिए बनाना सेब की जड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सख्त मिट्टी खोदने से पौधे की जड़ों को भी नुकसान हो सकता है। बागवानी विशेषज्ञ वर्षा के बाद नमी होने पर तोलिए बनाने और जड़ों को साफ करने की सलाह दे रहे हैं।
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. आगर दास ने बताया कि तोलिए बनाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। लेकिन भूमि में पर्याप्त नमी न होने के कारण तोलिए बनाने का काम मुश्किल है। सूखे में तोलिए करने से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है। इसलिए बागवानों को वर्षा का इंतजार करना चाहिए। भूमि में नमी आने के बाद ही तोलिए बनाने का कार्य करें।