चौपाल/नेरवा (रोहड़ू)। ठंड से बचने के लिए खिड़कियों पर बोरियाें के परदे, न टॉयलेट और न ही खेल का मैदान। बच्चों के लिए घने जंगल के बीच करीब एक किलोमीटर दूर शौचालय की सुविधा हो तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में सरकारें बच्चों की शिक्षा के लिए कितनी गंभीर हैं। कुछ ऐसा ही हाल है शिमला जिले की तहसील कुपवी के नंदपुर मिडल स्कूल का। यहां अध्ययनरत 34 विद्यार्थियों के साथ यह मजाक नहीं तो और क्या है।
सरकार ने स्कूल को अपग्रेड तो कर दिया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं किया। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि आज तक किसी ने शौचालय की व्यवस्था को लेकर पहल क्यों नहीं की। इस बारे में स्कूल प्रशासन ने क्या कुछ नहीं किया। स्कूल का न तो अपना भवन है और न ही मूलभूत सुविधाएं। इस स्कूल को स्तरोन्नत हुए करीब तीन साल हो गए हैं। इस अवधि में स्कूल को अपना भवन तक नहीं मिल पाया है। निजी भवन के तीन कमरों में चल रहे इस स्कूल की खिड़कियाें के शीशे तक तक टूटे हुए हैं। स्कूल में जुडु, शिलाल और खुब्डाली आदि गांव से विद्यार्थी पढ़ाई करने के लिए आते हैं। छात्रों ने तेज हवाओं और ठंड से बचने के लिए स्कूल के कमरों की खिड़कियों में नाइलोन की बोरियों के परदे लगाए हैं। जिस भवन में स्कूल चल रहा है, वह सड़क के किनारे स्थित है।
नए भवन का हो रहा निर्माण : छाजू
ग्राम पंचायत प्रधान जुड़ु-शिलाल छाजू राम और एसएमसी प्रधान गुलाब सिंह ने कहा कि स्कूल के नए भवन का निर्माण हो रहा है। शौचालय की सुविधा नहीं होने से बच्चों को शौच को खुले में करीब एक किमी दूर जाना पड़ रहा ह।
उच्च अधिकारियों को करवाया अवगत : रमेश चंद
मुख्याध्यापक रमेश चंद ने बताया कि इस विषय में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
गुड़िया प्रकरण से भी सबक नहीं
शिमला जिले के कोटखाई में हुए गुड़िया प्रकरण से भी सरकार की नींद नहीं टूटी है। इस स्कूल में पढ़ने वाले 34 विद्यार्थियों में लड़कियाें की संख्या करीब बीस है। स्कूल में शौचालय नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को ही उठानी पड़ती है।