अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
प्रदेश में हो रहे सड़क हादसों के बाद भी रामपुर के प्रतिष्ठित स्कूलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। क्षेत्र के डीपीएस और डीएवी जैसे स्कूलों में विद्यार्थियों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहन ही नियमों को ताक पर रखकर दौड़ाए जा रहे हैं। नूरपुर हादसे के बाद रामपुर में परिवहन निगम और स्थानीय प्रशासन ने स्कूलों में नियमों को ताक पर रखकर दौड़ाई जा रही बसों के संचालकों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि रामपुर क्षेत्र में चल रहे स्कूलों में अधिकतर स्कूली वाहन नियमों की पालना करने में कोताही बरत रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कोई हादसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? स्कूल प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन या फिर वाहन मालिक।
आरटीओ कृष्णा नेगी ने वीरवार को रामपुर के प्रतिष्ठित स्कूल डीपीएस में चल रही परिवहन निगम की छह बसों के चालान कर दिए। इसके अलावा उन्होंने इसी स्कूल के बच्चों को स्कूल ले जाने वाली निजी बसों को भी जब्त किया है। झाकड़ी में जब आरटीओ मौके पर बसों की जांच करने लगे तो मौके से चार वाहनों के चालक और परिचालक फरार हो गए। एसडीएम रामपुर डॉ. निपुण जिंदल ने रामपुर के डीएवी स्कूल में चल रही बसों के चालान कर 40 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका।
आरटीओ कृष्णा नेगी ने बताया कि ये वाहन यातायात नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे थे। एचआरटीसी के पास स्कूल का परमिट और बसों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण छह बसों के चालान, जबकि अंजलि बस सर्विस की दो बसों को परमिट और ओवरलोडिंग के चलते जब्त किया गया है। उन्होंने रामपुर, झाकड़ी और निरमंड जाकर 14 वाहनों के चालान किए हैं। आरटीओ ने कहा कि स्कूल प्रबंधन को भी इसके बारे में नोटिस भेज कर जवाब तलब किया जाएगा। एसडीएम निपुण जिंदल ने डीएवी स्कूल की बसों की जांच की और अधिकतर वाहनों में खामियां पाए जाने पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी किया। उन्होंने बताय कि कहीं बस के चालक के पास लाइसेंस नहीं है तो किसी बस में इंश्योरेंस नहीं है। किसी का प्रदूषण जांचा नहीं गया है तो किसी बस में आग को काबू करने वाले यंत्र नहीं लगे हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी। नियम दरकिनार करने वाले वाहनों पर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।