प्रदेश के पौने दो लाख कर्मचारियों का नेतृत्व करने वाले हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित महासंघ पर कब्जा जमाने को संगठन के नेताओं में खींचतान शुरू हो गई है। महासंघ नेताओं ने अपना शक्ति प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है, ताकि प्रदेश की नई भाजपा सरकार पर दबदबा बनाकर रखा जा सके। महासंघ नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी को अपने पास रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है, जिससे संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक में कर्मचारियों का नेतृत्व किया जा सके।
महासंघ की नई प्रदेश कार्यकारिणी के चुनाव 20 अप्रैल को तय किए गए हैं। इससे पहले महासंघ की जिला कमेटियों का गठन किया जाना है। जिला कमेटियों से महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी के चुनाव में डेलीगेट वोट करेंगे और नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के इस बार होने वाले चुनाव से पहले महासंघ नेताओं ने 20 साल के अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश कर्मचारी परिसंघ के नेताओं के साथ हाथ मिला लिया है। यही नहीं परिसंघ के प्रदेशाध्यक्ष विनोद कुमार को महासंघ की तदर्थ कमेेटी का अध्यक्ष चुना गया है। विनोद कुमार के नेतृत्व में ब्लॉकों और जिलों के चुनाव करवाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व महासंघ अध्यक्ष गोपाल दास वर्मा के खिलाफ बगावत कर20 साल पहले नेताओं ने परिसंघ का गठन किया था। परिसंघ के शीर्ष नेताओं का कांग्रेस शासनकाल में खूब उत्पीड़न होता रहा है और जब भाजपा सत्ता में आई तब इनको राहत मिलती रही है। पूर्व सरकार के समय कई कर्मचारी नेताओं की निलंबित भी किया गया था और उनकी बहाली वर्तमान सरकार ने कर दी है। इससे परिसंघ के उन नेताओं का मनोबल काफी बढ़ गया है और महासंघ के साथ मिलकर प्रदेश कार्यकारिणी पर कब्जा जमाने की पूरी तैयारी की जा चुकी है। महासंघ तदर्थ कमेटी अध्यक्ष विनोद कुमार कहते हैं कि पूर्व सरकार के सत्ता में रहते हुए पांच साल में सिर्फ एक जेसीसी बुलाई जा सकी, जबकि यह तीन माह में एक बार बुलाना अनिवार्य है। इसके लिए महासंघ के पूर्व पदाधिकारियों की कमजोरी साफ झलकी है। जिलों के कमेटी के गठन के बाद प्रदेश कार्यकारिणी के चुनाव होंगे। महासंघ सरकार से टकराव नहीं चाहती है, बल्कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगा।