सांगला (किन्नौर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सांगला में पिछले तीन साल से स्टाफ की कमी है। इसके चलते क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ी हैं। सांगला वैली के लोगों को एक्सरे, दांत और नेत्र रोग सहित कई अन्य बीमारियों के इलाज के लिए 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय रिकांगपिओ या फिर 100 किलोमीटर दूर रामपुर जाना पड़ रहा है।
जिले की सांगला वैली के किल्बा, सापनी, बटुरी, ब्रुआ, शौंग, चांसू, कामरू, सांगला, बटसेरी, थेमगारंग, रक्षम और छितकुल के करीब एक दर्जन गांव के सैकड़ों लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। लेकिन यहां बीते कई साल से स्टाफ की कमी है। वर्तमान में सीएचसी में दो डॉक्टरों के साथ-साथ एक स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट और एक हेल्थ एजूकेटर सेवाएं दे रहे हैं। 30 बिस्तरों की सुविधा वाले इस स्वास्थ्य केंद्र में वर्ष 2009 से एक्सरे तकनीशियन, जुलाई 2014 से दंत चिकित्सक, वर्ष 2013 से डेंटल मैकेनिक, वर्ष 2013 से नेत्र रोग विशेषज्ञ, तीन वार्ड सिस्टर, वर्ष 2014 से सुपरिंटेंडेंट और क्लर्क, एक फार्मासिस्ट और वर्ष 2013 से अस्पताल में दो सफाई कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं। पूर्व प्रधान छितकुल मुकेश नेगी, पूर्व प्रधान रक्षम टीकम नेगी, रामलाल नेगी, वीरेंद्र नेगी, उप प्रधान सांगला भूपेश नेगी, अनिल नेगी, हिम्मत नेगी, प्रमोद नेगी, राजकमल नेगी, विजय नेगी, कुलदीप नेगी आदि ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में रिक्त पदों को भरने की मांग की है। इससे बर्फबारी में लोगों को परेशानी नहीं होगी। जन प्रतिनिधियों ने पत्र के माध्यम से सीएमओ किन्नौर डॉ. पदम नेगी, बीएमओ सांगला डॉ. वेंकट नेगी को सूचित किया। लेकिन अस्पताल में हालात नहीं बदले। उधर, इस बारे में सीएमओ किन्नौर डॉ. पदम नेगी ने कहा कि सरकार को बार-बार पत्र लिखकर अवगत करवाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की तैनाती होगी।