रोहड़ू।सेब के बगीचों में बागवानों ने खाद डालने का काम शुरू कर दिया है। अधिकांश बागवान अभी तक मिट्टी की जांच के बिना उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों की राय है कि जैविक या रासायनिक खादों का कम या अधिक प्रयोग पौधे के लिए घातक हो सकता है। अच्छी पैदावार के लिए बागवान सेब के बगीचों में हर साल सर्दी के मौसम में खादों का प्रयोग करते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि अकसर बागवान मिट्टी की जांच के बिना खादों का प्रयोग करते हैं। पौधे में पोषक तत्व का संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यकता के अनुसार खादों का प्रयोग होना चाहिए। अधिक या कम खादों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है। पौधे में भी पोषक तत्व का संतुलन खराब होने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि बागवानों को मिट्टी की जांच करवाने के बाद ही खादों का प्रयोग करना चाहिए। डॉ. नरेंद्र कायथ ने बागवानों को सलाह दी है कि बगीचे के अलग-अलग भाग से मिट्टी के नमूने जांच के लिए निकाल कर सरकारी लैब में भेजें। नमूने की मिट्टी को सूती थैली में भरें। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि मिट्टी परीक्षण के बाद ही बगीचों में खादों का प्रयोग करें। दिसंबर से फरवरी तक बगीचों में खाद डालने का उपयुक्त समय रहता है।