देश के अन्य हिस्सों से कटा किन्नौर जिले का संपर्क
सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है नेशनल हाईवे पांच
किन्नौर जिले के हजारों सेब बागवान हो रहे परेशान
सुभाष सेन
रामपुर बुशहर। इसे नेशनल हाईवे प्राधिकरण की नाकामी कहें या फिर प्रशासनिक गलती। ज्यूरी के साथ लगते बधाल में बीते दिनों पहाड़ी से बड़े पत्थर गिरने से नेशनल हाईवे पांच का कई फुट हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन नेशनल हाईवे प्राधिकरण ने इसकी मरम्मत सही ढंग से नहीं की, जिस कारण शुक्रवार रात को एक भारी भरकम ट्राला इस स्थान पर फंस गया। इसका खामियाजा जिला किन्नौर के आम लोगों के साथ-साथ हजारों बागवानों को भुगतना पड़ रहा है।
एनएच पांच पर ट्राला फंसने से किन्नौर जिले का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। सामरिक दृष्टि से भी यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। देश की सीमा के साथ तैनात भारतीय सेना को राशन सहित अन्य सामग्री इसी मार्ग होकर पहुंचाई जाती है। ऐसे में एनएच बाधित होना प्रशासन और एनएच प्राधिकरण की नाकामी को दर्शा रहा है। शुक्रवार रात से बाधित हुए एनएच के कारण जहां किन्नौर और शिमला जिले के हजारों लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ी। वहीं सबसे अधिक प्रभावित जनजातीय जिले के हजारों सेब उत्पादक हुए हैं। हजारों पेटी सेब एनएच बाधित होने के कारण फंस गया है, अब समय पर फसल मंडी नहीं पहुंच पाएगी और बागवानों को सेब के दामों में होने वाली गिरावट की मार भी झेलनी पड़ेगी। वहीं देश विदेश से किन्नौर जिले की खूबसूरती को निहारने पहुंचने वाले पर्यटकों को भी दिन भर वाहनों में बैठकर मार्ग खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। अब चंडीगढ़ से पहुंचने वाले इंजीनियरों पर आगे की स्थिति छोड़ दी गई है। रविवार को भी दिन भर लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। ये इंजीनियर कितने समय में ट्राले पर लोड की गई मशीन को हटा पाएंगे, इस बारे में बताना कठिन है।
एनएच प्राधिकरण के एक्सईएन पीसी नेगी ने बताया कि दो क्रेन एनएच पर फंसे ट्राले को हटाने के लिए मंगवाई गई थी, लेकिल भारी भरकम मशीन को हटाने में सफलता नहीं मिल पाई है। रविवार को कंपनी के इंजीनियरों के आने के बाद ही एनएच बहाल होने की स्थिति साफ हो पाएगी।