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डूघा स्कूल में तीन छात्रों के लिए एक अध्यापक

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डूघा स्कूल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
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आनी (कुल्लू)।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल रामभरोसे चल रहे हैं। यहां पर सरकारें स्कूल तो खोल देती है, लेकिन उनमें सुविधाएं और स्टाफ की सुध नहीं ली जाती है। सरकारें स्कूल खोलकर वाहवाही लूटने तक सीमित रह जाती है। क्षेत्र के विधायक, नेता भी इस बारे में कुछ नहीं करते। सभी वोट तक सीमित रहते हैं। स्थानीय लोग कई बार मांग उठाते हैं, जो पूरी नहीं होती है। राजकीय माध्यमिक पाठशाला डूघा का भी यही हाल है। एक तो स्कूल भवन जर्जर और ऊपर से शिक्षकों का टोटा छात्रों के लिए आफत बन रहा है। जर्जर भवन गिरने से कभी भी कोई हादसा हो सकता है। भवन किसी ढारे से कम नहीं लगता।
आलम यह है कि यहां पर आज तीन ही विद्यार्थी बचे हैं, अन्य सभी च्वाई स्कूल में पलायन कर चुके हैं। छठी में कोई छात्र नहीं, जबकि सातवीं में दो और आठवीं में एक विद्यार्थी अध्ययनरत है। शिक्षकों की कमी के कारण ऐसा हो रहा है। माध्यमिक स्कूल में एक ही अध्यापक है। दो अध्यापकों के पद खाली चल रहे हैं। अभिभावक भी अध्यापकों की कमी के कारण बहुत परेशान हैं। एक प्रयास संस्था जिला कुल्लू के अध्यक्ष विवेक ठाकुर सहित ग्रामीण राज कुमार, संजू देवी और तारा देवी का कहना है कि स्कूल की हालत सुधारने के लिए प्रदेश सरकार, शिक्षा विभाग को कोशिश करनी चाहिए। शिक्षा विभाग से जल्द भवन बनाने की मांग की है। राजकीय माध्यमिक स्कूल डुघा के पास फर्नीचर की भी कमी है। यहां पर अलमारी, टेबल और कुर्सियों की कमी है। कूड़ेदान की उचित व्यवस्था नहीं है। मिड-डे मील का भोजन भी प्राइमरी स्कूल के साथ मिलकर बनता है। अभी तक मिड-डे मील वर्कर की नियुक्त नहीं हो सकी। उधर, स्कूल अध्यापक अजीत कुमार ने बताया कि स्कूल में छात्रों की संख्या तीन रह गई। स्कूल में बच्चों को बैठने और पढ़ने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। इससे छात्र अन्य स्कूलों में पलायन कर रहे हैं।
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बिना बजट खोला पूर्व सरकार ने स्कूल : किशोरी
आनी क्षेत्र के विधायक किशोरी लाल सागर ने बताया कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने बिना बजट के स्कूल खोला था, जिससे ऐसी स्थिति हुई है। भाजपा सरकार जल्द बजट का प्रावधान कर शिक्षकों की तैनाती करेगी।



सड़क से डेढ़ किमी दूर है स्कूल
डुगा स्कूल सड़क सुविधा से अभी तक वंचित है सड़क से इस पाठशाला की दूरी लगभग डेढ़ किमी है। एक जनवरी 2017 को डूगा के प्राइमरी स्कूल को माध्यमिक स्कूल का दर्जा हासिल हुआ। विरासत में इसे प्राइमरी स्कूल का जर्जर भवन ही मिला। अभिभावक कला ठाकुर का कहना है कि मजबूरी में उन्हें अपने गांव का स्कूल छोड़ कर एक घंटा पैदल सफर कर च्वाई स्कूल में अपने बच्चों को प्रवेश दिलवाना पड़ा। डुगा स्कूल में स्टाफ की कमी है।
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यह है एसएमसी का तर्क
एसएमसी डूघा के प्रधान महिंद्र का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण छात्र स्कूल से पलायन कर गए। इस बारे में ग्राम पंचायत के प्रधान को भी अवगत करवाया। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पूर्व में एसएमसी के प्रधान रहे भाग चंद का कहना है कि घर के स्कूल को छोड़ कर बच्चों को पांच किमी दूर के स्कूल में भेजना लोगों की मजबूरी है।
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