रिकांगपिओ (किन्नौर)। परियोजना से रिहायशी मकानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिलने से किन्नौर की मीरू पंचायत के ग्रामीणों ने डीएलआई कंपनी के खिलाफ रोष जताया है। कंपनी प्रबंधन पर मुआवजा देने के नाम पर मजाक का आरोप लगाया है। मीरू पंचायत के उप प्रधान शेर चंद सहित कई ग्रामीणों न प्रेस को जारी बयान में कहा कि मीरू क्षेत्र में डीएलआई कंपनी की ओर से भूमिगत जल विद्युत परियोजना निर्माण के दौरान भारी विस्फोटों का प्रयोग करने से क्षेत्र में करीब 150 रिहायशी मकानों में दरारें पड़ गई हैं। कंपनी ने करोड़ों के नुकसान पर करीब 25 लाख का ही मुआवजा दिया, जो नाकाफी है।
ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए डीएलआई कंपनी ने हाल ही में लाडा कमेटी के माध्यम से नुकसान का आकलन करवाया। इसके बाद कंपनी की ओर से नुकसान की भरपाई के लिए जो राशि प्रशासन के माध्यम से दी जा रही, वह प्रभावितों के साथ भद्दा मजाक है। ग्रामीणों ने सर्वे कमेटी पर कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नुकसान कम दिखाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का यहां तक कहना है कि कई मकानों की पूरी दीवारें तक गिर चुकी हैं। लेकिन उन्हें भी चंद हजार रुपये में ही निपटाने की कोशिश की गई है। उन्होंने बताया कि डीएलआई कंपनी इस पूरे मामले पर फिर विचार करे। घरों के नुकसान का आकलन दोबारा किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो ग्रामीण कंपनी प्रबंधन के खिलाफ न्यायालय जा सकते हैं। उधर, डीएलआई कंपनी के डीजीएम मनोज शाह ने बताया कि लाडा कमेटी ने क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन किया है। किन पैरा मीटर पर यह आकलन हुआ है उसकी उनको कोई जानकारी नहीं है।