डंसा (रामपुर बुशहर)। रामपुर उपमंडल के तहत कई जंगलों में बीते एक सप्ताह से आग लगी है, जिससे करोड़ों रुपये की वन संपदा जलकर स्वाह हो गई है। रामपुर के डंसा, सनातली, तकलेच की खनोटू बीट के जंगलों में आग से भारी नुकसान पहुंचा है। हर वर्ष सर्दियों के मौसम में जंगलों में आग से चीड़, कायल, देवदार और अन्य जंगली पौधों को क्षति होती है। इससे पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मंगलवार रात को सनेई गांव के कांडलू जंगल में लगी आग पर कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया। महिलाओं ने वन विभाग के कर्मियों के साथ आग बुझाने में सहयोग दिया। आगजनी की घटना में अभी तक हजारों हेक्टेयर जंगल को भारी नुकसान पहुंचा है।
आग के कारण कई जीव-जंतु मर रहे हैं। जंगलों में आग से जंगली जानवर भी बचने के लिए रिहायशी इलाके की ओर से आ रहे। डंसा बीट के तहत बीते एक सप्ताह से अग्निकांड से हजारों की संख्या में हरे-भरे पेड़, पेड़ों को भारी नुकसान हुआ है। वनों की सुरक्षा का जिम्मा वन विभाग ने इक्का दुक्का निहत्थे चौकीदारों को दिया है। सड़क सुविधा से महरूम जंगलों में अग्निशमन जैसी सेवाएं मुमकिन नहीं हो पाती। ऐसे में जंगल की आग पर काबू पाना और भी मुश्किल हो जाता है। हर वर्ष वन विभाग नए पौध लगाता है, जिस पर भारी भरकम राशि व्यय होती है। बावजूद इसके वनों के संरक्षण और आग से निपटने के लिए वन विभाग कोई पुख्ता प्रबंध नहीं कर पाया है। विभाग केवल वनों में आग लगाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने तक ही सीमित रह जाता है। महिला मंडल सनेई की प्रधान रोशनी देवी, सचिव सोदा देवी, जगूणी प्रधान सुमन लता, सचिव निशा देवी, ग्रामीण शाम लाल, गोवर्धन दास, साध राम, जगदीश हुड्डन, गुरजीत सिंह, सूरज, गोकुल राम और शिशु पाल सहित अन्य ग्रामीणों ने आग से निपटने के लिए वन विभाग का सहयोग किया।
अगल-अलग बीटों में नुकसान : अशोक
वन मंडलाधिकारी अशोक नेगी ने माना कि आग से वन विभाग की अलग-अलग बीटों में करोड़ों का नुकसान पहुंचा है। वन विभाग के कर्मचारी ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। अग्निकांड से वनों को पहुंच रहे नुकसान की रिपोर्ट समय-समय पर सरकार को भेजी जाती है।