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दूध के दाम में बढ़ोतरी न होने से हजारों दुग्ध उत्पादक खफा

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दूध के दाम में बढ़ोतरी न होने पर रोष
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24 को 200 सोसायटियों के दुग्ध उत्पादक दत्तनगर में बोलेंगे हल्ला
दत्तनगर मिल्क प्लांट में रोजाना आता है करीब 50 हजार लीटर दूध
दूध के दाम में वृद्धि को लेकर गांव-गांव में किसान सभा कर रही बैठकें
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। लंबे समय से दूध के दाम में बढ़ोतरी नहीं होने से हजारों दुग्ध उत्पादक खफा हैं। इसी मुद्दे को लेकर किसान सभा के नेतृत्व में दुग्ध उत्पादक 24 दिसंबर को दत्तनगर मिल्क प्लांट में हल्ला बोलेंगे। इसी कड़ी में सभा के सदस्य विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादकों के साथ बैठक कर रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। सोमवार को हिमाचल किसान सभा ने रामपुर के टूटू, बरकेली और डोई गांव में बैठकें आयोजित कर आगामी धरने को लेकर रणनीति बनाई। यह बैठक सभा के ओम प्रकाश भारती और दयाल सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
गौरतलब है कि किसान सभा उपमंडल रामपुर और आसपास के 5 ब्लॉकों के दुग्ध उत्पादकों को लामबंद कर दत्तनगर प्लांट में विरोध प्रदर्शन करेगी। दत्तनगर मिल्क प्लांट में रामपुर के अलावा छह ब्लॉक, निरमंड, करसोग, आनी, नारकंडा, ननखडी, कुमारसैन की 200 सोसायटी से प्रतिदिन 50 हजार से 60 हजार लीटर दुध हर रोज आता है लेकिन दूध के दाम कम मिलने से दुग्ध उत्पादकों में रोष है। वहीं किसान सभा के नेताओं का कहना है कि दूध के दाम में वृद्धि को लेकर हिमाचल किसान सभा अलग-अलग क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादकों के साथ मिलकर बैठकों का दौर जारी है। बैठकों में गांव के सभी दुग्ध उत्पादक बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं और 24 दिसंबर को दत्तनगर में धरने की पूरी तैयारी किए हुए हैं।
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गौर रहे कि सभा के बैनर तले दुग्ध उत्पादक बीते लंबे समय से दूध के दाम में वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। बावजूद इसके समस्या आज भी बरकरार है। सभा के ओम प्रकाश भारती ने कहा कि 3 महीने पूर्व 27 अगस्त को दुग्ध उत्पादक शिमला विधानसभा में पशुपालन मंत्री से मिले और मंत्री के द्वारा मूल्य वृद्धि का आश्वासन मात्र आश्वासन बनकर ही रह गया। इलाके के हजारों दुग्ध उत्पादक दूध के दाम में बढ़ोतरी की राह देख रहे हैं। तीन माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी दूध के मूल्य में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं हुई। वहीं दत्तनगर स्थित दुग्ध प्लांट के प्रबंधकों ने दुग्ध संग्रहण केंद्रों पर फैट और दूध में प्रोटीन जांचने समय मशीन लगाने की बात भी कही थी, जो अभी तक नहीं दी गई है। इसके चलते दुग्ध उत्पादकों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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