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फाइबर के बने शेडों में पढ़ रहा देश का भविष्य

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अमर उजाला ब्यूरो

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सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के दिल्ली पब्लिक स्कूल भावानगर का भवन दस साल से जर्जर अवस्था है। विद्यार्थी खतरे के साये में शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। अभिभावकों में रोष है कि भवन की दशा सुधारने में सरकार, एसजेवीएनएल और शिक्षा विभाग कोई पहल नहीं कर रहा है। निचार खंड के प्रोजेक्ट प्रभावित क्षेत्र के करीब 160 छात्र-छात्राएं स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 को आठ कमरों के भवन को स्कूल प्रबंधन ने असुरक्षित घोषित किया है। इसके चलते स्कूल की दूसरी, तीसरी और चौथी कक्षा के 60 बच्चों को फाइबर के बने चार शेडों में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। वहीं कई बच्चों को भवन के अभाव के चलते दो मंजिला रिहायशी 8 कमरों वाले भवन में रहकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिसकी हालत दयनीय बनी हुई है। भवन की दीवारों पर कई जगह दरारें पड़ी हैं, जो कभी भी ढह सकती हैं। फाइबर के बने चार शेडों में दूसरी, तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बच्चों को गर्मियों के दिनों में तेज गर्मी तो बरसात के दिनों में बारिश के पानी के रिसाव की मार झेलनी पड़ती है।
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स्कूल प्रबंधन की लचर व्यवस्था के चलते स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों में खासा रोष है। उप प्रधान सुंगरा राकेश नेगी, जिला परिषद सदस्य तरांडा केवल राम नेगी, उप प्रधान नाथपा प्रकाश चंद नेगी, डीडी नेगी और योगराज नेगी सहित कई अन्यों अभिभावकों ने सरकार, जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन से जल्द नया भवन बनाने की मांग उठाई है।
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एसएमसी अध्यक्ष हीरा सिंह नेगी के अनुसार स्कूल भवन न होने के कारण छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इस संबंध में कमेटी कई बार स्कूल प्रबंधन से मिल चुकी है। उम्मीद है जल्द ही इस बारे में कोई कदम उठाया जाएगा। उधर, प्राचार्य कमल चंद ने बताया कि नए स्कूल भवन बनाए जाने का मामला स्कूल प्रबंधन के पास है। अभी कक्षाएं अस्थायी तौर पर चल रही हैं। नया भवन बनाया जाना है। टेंडर होते ही भवन निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।

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