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तकनीकी खामियों का दंश झेल रहे 6 पंचायतों के हजारों ग्रामीण

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डंसा (रामपुर बुशहर)। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हजारों लोगों की प्यास बुझाने के मकसद से समर्पित देवठी-डंसा ग्राम समूह उठाऊ पेयजल योजना शुरू से ही विवादों में रही है। सेरी पुल से बाहलीधार के लिए लिफ्ट की गई सिंचाई विभाग की उक्त पेयजल योजना तकनीकी खामियों के चलते ग्रामीणों को पर्याप्त पेयजल मुहैया करवाने में नाकाम साबित हो रही है। कभी वोल्टेज की समस्या, कभी पाइप फटने और कभी गाद जमने से समस्याएं आड़े आ रही हैं। आईपीएच विभाग बीते लंबे समय से चली आ रही खामियों को निपटाने में नाकाम साबित हो रहा है।
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आधा दर्जन पंचायतों के उपभोक्ता गर्मियों के दिनों में पेयजल के लिए दर दर ठोकरें खाने को मजबूर हैं। उपमंडल रामपुर की डंसा, लालसा, देवठी, कूहल, शिंगला और मुनिष पंचायतों के हजारों लोग इस पेयजल योजना से लाभान्वित होते हैं। योजना पर 16 करोड़ से अधिक राशि खर्च होने के बावजदू यह योजना सफेद हाथी साबित हो रही है। पेयजल योजना के ठप होने से खास कर डंसा पंचायत के जगूणी, डंसा, शांदल, बाहलीधार, पनोली और नोगीधार के ग्रामीण प्रभावित हाते हैं। वहीं विभाग की लापरवाही के चलते लाखों की लागत से ग्राम जगूणी के लिए नाग बावड़ी उठाऊ पेयजल योजना भी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप खरी नहीं उतर पा रही है। विभाग द्वारा उक्त स्टोरेज टैंक की सुरक्षा के भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। क्षेत्र के अजय, लायक राम, जय सिंह, गौतम लाल, गौरी दत्त, शिशुपाल, योगेंद्र सिंह, गोवर्धन दास, दिनेश और दुर्गा सिंह सहित कई अन्य ग्रामीणों ने विभाग की लचर कार्यप्रणाली को दोषी ठहराया है। उन्होंने विभाग को चेताते हुए कहा कि यदि जल्द ही पेयजल योजना सुचारु रूप से नहीं चलाई गई तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
उधर, आईपीएच विभाग डंसा के कनिष्ठ अभियंता राजेंद्र शर्मा के अनुसार नाग बावड़ी उठाऊ पेयजल योजना स्टोरेज टैंक के चारों ओर फेंसिंग और स्लैब निर्माण को टेंडर आवंटित किया जा चुका है। जल्द ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
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