सांगला (किन्नौर)। किन्नौर के पंचायत जनप्रतिनिधि लोकसभा चुनाव के बाद पूरे प्रदेश सहित किन्नौर के पंचायती राज के विकास कार्यों को ई टेंडरिंग करने की तैयारी से खफा हैं। किन्नौर जिले के तीनों खंडों कल्पा, निचार और पूह के 65 पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने सरकार के इस फैसले को नकारा है। उनका कहना है कि इस तरह के बड़े फैसलों से एक तो जनजातीय क्षेत्र के ग्रामीणों का के साथ सरासर नाइंसाफी होगी।
पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार गांव के गरीबी रेखा से नीचे के लोग पूरी तरह से रोजगार के लिए पंचायतों पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर सरकार ने यह फैसला लिया तो जिले के लोगों के साथ भेदभाव होगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का रोजगार भी छिन जाएगा। वहीं पंचायत जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में विकास कार्य भी सही से नहीं हो पाएंगे।
प्रधान पूह सुमन साना, उपप्रधान पूह सुशील साना, प्रधान नेसंग अशोक नेगी, उपप्रधान आशा नेगी, प्रधान रिब्बा प्रीति नेगी, प्रधान जंगी प्रिया नेगी, प्रधान ठंगी सूर्य बोरस, प्रधान कुन्नोचारंग पूर्ण सिंह नेगी, प्रधान नमज्ञा कर्मा नेगी, प्रधान तरांडा रीता नेगी, प्रधान पौंडा राजकुमारी नेगी, प्रधान पानवी रोशन लाल नेगी, प्रधान चगांव बीर सिंह नेगी, पूर्व उप प्रधान निचार वीरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व उपप्रधान पानवी डीजी नेगी, राकेश नेगी, प्रमोद नेगी, राजकमल नेगी, विजय नेगी, अजय नेगी, विनोद नेगी, सुरजीत नेगी, सांभा दोर्जे नेगी, महेंद्र सिंह नेगी, जीत सिंह नेगी, दीपक नेगी, दिव्या नेगी, परवेश नेगी, योगेंद्र नेगी, यश नेगी, मनोज नेगी, राजीव नेगी, प्रभाकर नेगी, पवन नेगी, रामकुमार नेगी और यशवंत नेगी सहित अन्य लोगों ने प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग से मांग की है कि इस फैसले को दिशा-निर्देश देने से पूर्व कोई प्रभावी कदम उठाएं। वहीं इस संबंध में उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद के अनुसार अभी तक कोई गाइड लाइन हमारे पास नहीं है। इस तरह के फैसले सरकार की ओर से लिए जाते हैं। फिलहाल इसके कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं।