वन अधिकार अधिनियम के उठे मुद्दे
वन अधिकार समिति एवं हिम लोक जागृति मंच का सम्मेलन आयोजित
राजनीतिक दलों से समिति के मांगपत्र को घोषणापत्र में शामिल करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
रिकांगपिओ (किन्नौर)। रिकांगपिओ में जिला वन अधिकार समिति एवं हिम लोक जागृति मंच की ओर से एक दिवसीय सम्मेलन में वन अधिकार अधिनियम संबंधित मुद्दों पर गहनता से चर्चा की र्गई। सम्मेलन में जिला के विभिन्न गांव के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।
इस मौके पर जिला वन अधिकार समिति किन्नौर अध्यक्ष जियालाल ने कहा कि किन्नौर में अभी तक 10 हजार से अधिक नौतोड़ और एफआर वन अधिकार के तहत 25 सौ मामले लंबित हैं। चंबा में 53 और लाहौल-स्पीति में 76 मामलों को वहां के उपायुक्त ने मंजूरी दी है। वहीं किन्नौर में लिप्पा गांव के 47 मामले जिलाधीश किन्नौर और जिला स्तरीय कमेटी के पास पहुंचे थे, लेकिन किसी कारण वश उन्हें मंजूर नहीं किया गया। कानून के तहत 2005 से पहले जिस किसान और ग्रामीणों ने भूमि पर अवैध कब्जा किया था, उन्हें इस कानून के तहत भूमि मिलनी चाहिए थी।
हिम लोक जागृति मंच के जिला संयोजक आरएस नेगी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने नौतोड़ की अवधि सीमा 1 वर्ष के लिए बढ़ा दी है। प्रदेश की विभिन्न पार्टियों के प्रमुखों को 25 सूत्रीय मांग पत्र, जिसमें विशेषकर वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन, नौतोड़ मंजूरी और जल विद्युुत परियोजनाओं के निर्माण के समाधान करने बाबत उनके घोषणापत्र में भी शामिल करने के लिए कहा गया है। यदि इस मांग पत्र को पार्टियां अपने घोषणा पत्र में स्थान या विचार नहीं करती है तो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए संगठन मिलकर ठोस कदम उठाने पर मजबूर होगी। वहीं सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने भी किसानों को संबोधित किया। इस मौके पर वन अधिकार समिति उपाध्यक्ष सीता राम, जिला परिषद सदस्य दौलत सिंह नेगी, दुर्गा चंद नेगी, भगत सिंह नेगी, प्रकाश चंद, टाशी, नानक चंद और परमेश्वर नेगी सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।