किन्नौर में अब तक जिला प्रशासन ने 3943 बंदूकों के लाइसेंस जारी किए हैं। इसमें से लोकसभा चुनाव के मुद्देनजर अभी तक किन्नौर के भिन्न-भिन्न पुलिस थानों और चौकियों में 1585 बंदूकें जमा की गई हैं। वहीं रिकांगपिओ मालखाने में 308 बंदूकों को जमा किया गया है। शेष मामले में पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा ने विशेष टीम बनाकर बंदूक लाइसेंसधारकों की जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
एसपी साक्षी वर्मा के अनुसार किन्नौर में 2245 बंदूकों और किन्नौर से बाहर रहने वाले जिनका अस्थायी पता किन्नौर दर्शाया गया है, ऐसे 1141 बंदूकों का लाइसेंस जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए हैं। कुछ ऐसे भी मामले पुलिस के संज्ञान में आए हैं कि दादा से बेटा, बेटा से पोता और कुछ बंदूकें बेची भी गई हैं, जिनका नाम अभी भी लाइसेंस रजिस्टर पर अंकित है, इनकी संख्या 571 दर्शाया गया है। आर्मी नौजवानों को चुनाव के दौरान बंदूकों को जमा करने की विशेष छूट दी गई है। इनकी संख्या 365 है। वहीं प्रदेश के नागरिकों के 180 बंदूकों का लाइसेंस और प्रदेश से बाहरी राज्यों के बाशिंदों का 538 बंदूकों का लाइसेंस बना हुआ है, लेकिन इस वक्त वे बाशिंदे किन्नौर में निवास नहीं करते हैं। किन्नौर से बाहर रहने वाले नागरिकों के अभी तक 34 बंदूकों के लाइसेंस रद्द हो चुके हैं। किन्नौर में अब सिर्फ 96 बंदूकों को जमा करना शेष रहता है। किन्नौर में 2017 विधानसभा चुनाव में 1288 बंदूकें जमा हुई थी।
पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा का कहना है कि किन्नौर में अभी तक 97 प्रतिशत बंदूकें विभिन्न पुलिस थानों और चौकियों में जमा हुई हैं। किन्नौर के कुछ भेड़ पालक अभी किन्नौर से बाहर हैं। उनके आने पर 100 प्रतिशत बंदूकें जमा हो जाएंगी। किन्नौर की पुलिस विशेष वेरीफिकेशन करने में जुटी हुई है, यदि लाइसेंस सही नहीं पाए गए तो जिला प्रशासन उपायुक्त को इनके लाइसेंस रद्द करने के लिए लिखा जाएगा।