रोहडू। मध्यम और निचले क्षेत्रों के सेब बगीचों में फूल निकलने की प्रकिया शुरू हो गई है। फूल निकलने से फल बनने तक बागवानों को बगीचे में खास एहतियात की जरूरत रहती है। बागवानी विशेषज्ञ ने सभी बागवानों को सलाह दी है कि कीटनाशक का छिड़काव बंद कर अच्छी पैदावार के लिए बगीचों में मधुमक्खियों के बक्से लगाएं। कीटनाशक से मक्खियों और मित्र कीटों को नुकसान होता है।
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. कुशाल मेहता के मुताबिक सेब के बगीचों में इन दिनों परागण की प्रक्रिया चल रही है। परागण की प्रक्रिया में मधुमक्खी और दूसरे कीट की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए पैदावार को बढ़ाने के लिए सही ढंग से देखरेख की आवश्यकता होती है। बदलते मौसम के साथ सेब के पौधों को और भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कीटनाशक के छिड़काव से मधुमक्खी और दूसरे कीटों को भी नुकसान हो सकता है। मधुमक्खियों के आने से ही फूलों के परागण में भूमिका रहती है। कीटनाशकों के प्रयोग से मधुमक्खियों को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि ऐसा रसायन, जिससे गंध निकलती हो उसका प्रयोग किसी भी परिस्थिति में न करें। इससे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होगी। कुशाल मेहता ने कहा विदेशों में पिंकसे लेकर पंखुड़ी पात तक यदि बागवान ने कीटनाशक का उपयोग किया है तो उसको मधुमक्खियां नहीं दी जातीं। सेब बागवानी सौ प्रतिशत परागण प्रक्रिया पर निर्भर है।
उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि समय-समय पर दवाइयों के छिड़काव और अच्छी गुणवत्ता के फल तैयार करने के लिए उद्यान विभाग के विशेषज्ञों की सहायता ली जा सकती है।