अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। किसान संघर्ष समिति ने सरकार पर शिमला और किन्नौर के बागवानों के साथ आढ़तियों की ओर से प्रतिवर्ष की जा रही लूट और धोखाधड़ी को लेकर कार्रवाई न करने पर रोष जताया है। इसी मुद्दे को लेकर 19 मार्च को नारकंडा विश्राम गृह में किसान संघर्ष समिति की बैठक निर्धारित की गई है।
किसान संघर्ष समिति की जिला कार्यकारिणी सदस्य देवकी नंद, राकेश वर्मा, ओंकार शाद, पूर्ण ठाकुर, पूर्ण ठाकुर, प्रेम चौहान, सुखदेव, जगदीश, कपिल भारद्वाज और तारा चंद ने कहा कि एपीएमसी कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि जो भी खरीददार (लदानी) होगा, वह जितना भी कारोबार करेगा, उसको इसके लिए बैंक गारंटी रखनी होगी। जैसे ही बागवान की बोली फाइनल होगी, उसी समय आढ़ती को उसकी पेमेंट करनी होगी। लेकिन आढ़ती, एपीएमसी और सरकार के गठजोड़ के कारण यह कानून लागू नहीं किया जा रहा है। ऐसे में बागवानों के साथ लूट और धोखाधड़ी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि एपीएमसी शिमला-किन्नौर के पास 300 से ज्यादा बागवानों की शिकायतें पहुंची हैं, जो सरकार ने विस में राकेश सिंघा के प्रश्न के उत्तर में कही, लेकिन एपीएमसी कोई भी कार्रवाई करने में विफल है। किसान संघर्ष समिति के माध्यम से कोटखाई और ठियोग के 12 बागवानों ने ठियोग पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज करवाई थी और इस कार्रवाई के तहत ही इनके पैसे मिले हैं। इस फर्म के तीन पार्टनरों में से 2 ने पैसा दे दिया है। भविष्य में बागवानों को लूट से बचने के लिए एकजुट होना पड़ेगा। 19 मार्च को नारकंडा विश्राम गृह में किसान संघर्ष समिति की बैठक निर्धारित की गई है। कोई भी बागवान इस बैठक में हिस्सा ले सकता है। इसी प्रकार के बैठकों को अन्य क्षेत्रों में भी बागवानों को इकट्ठा करने के लिए की जाएगी।