दलाश (कुल्लू)। आजादी के सात दशक बाद भी कई गांव सुविधा से वंचित हैं। प्रदेश में सरकार चाहे कांग्रेस की हो या फिर भाजपा की। इन गांवों में रहने वाली जनता का दर्द कोई नहीं समझ पाया है। ऐसा ही एक मामला विकास खंड निरमंड की शिल्ली पंचायत का है। शिल्ली पंचायत का बशला गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। यदि गांव में कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है, तो उसे कुर्सी या चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। मरीज की गंभीर हालत में मुश्किल और भी बढ़ जाती है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए करीब एक घंटे का समय लग जाता है। गर्भवती महिलाओं के साथ भी ऐसा ही होता है। दो साल पहले बीमार एक युवक की जान जा चुकी है। उसने अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में दम तोड़ दिया था।
बशला गांव के लोग बीते कई वर्षों से गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। इस गांव तक सड़क निकलने से करीब 700 ग्रामीणों को लाभ मिलेगा। वर्ष 2014 में गांव के लोगों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था। लेकिन आज भी इस गांव के लोग सड़क सुविधा से पूरी तरह से महरूम हैं। बीडीसी सदस्य डॉ. इंद्रपाल का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन बशला गांव तक सड़क निकालते हैं तो इससे लटोग, बाघीधार, सुमा, गवाह, दुवाह गांव के सैकड़ों लोगों को लाभ मिलेगा। ग्रामीण राकेश शर्मा, विनय शर्मा, श्याम लाल, दौलत राम, चेतन शर्मा, ज्ञान चंद, राम लाल, भाग चंद, इंद्र देव, ओम प्रकाश, प्रेम ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सड़क से गांव तक पहुंचने में लोगों को पैदल ही जाना पड़ता है। सड़क नहीं होने से लोगों को गृह निर्माण सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
लोेगों ने सौंपी है विभाग को जमीन
गांव के 35 लोगों ने करीब दो वर्ष पूर्व विभाग को सड़क निर्माण के लिए जमीन संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कर विभाग को सौंप दी हैं। सड़क से गांव तक सीमेंट का कट्टा 60 रुपये, रेत 60 और आटे का कट्टा 50 रुपये देकर पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग से जल्द सड़क निर्माण कर ग्रामीणों को राहत देने की मांग की है।
सरकार के सामने रखेंगे मामला : मीना
शिल्ली पंचायत प्रधान मीना देवी का कहना है कि ग्रामीणों के एफिडेविट देने के बाद भी लोक निर्माण विभाग सड़क बनाने का कार्य शुरू नहीं कर पाया है। इस मामले को सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
निर्माण कार्य जल्द होगा शुरू : विनोद
लोक निर्माण विभाग नित्थर के एसडीओ विनोद कुमार का कहना है कि सड़क की डीपीआर तैयार कर ली गई है। जल्द ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जंगल के रास्ते आठ किमी पैदल सफर कर पहुंचते है स्कूल
बशला और आसपास के गांवों के छात्रों को जमा दो की शिक्षा के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सराहर या सीसे स्कूल दुराह जाना पड़ता है। दोनों स्कूलों की दूरी करीब छह से आठ किमी है। छात्रों को पैदल जंगल के रास्तों से आवाजाही करनी पड़ती है। इससे उनकी सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित रहते हैं।