रोहड़ू। इन दिनों बागवान सूखे की मार झेल रहे हैं। इसके चलते बागीचों में तौलिये बनाने का कार्य करना बागवानों के लिए मुश्किल हो गया है। बागवानी विशेषज्ञ भी सूखे में तौलिये न बनाने की सलाह दे रहे हैं। इससे सेब की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
दिसंबर माह शुरू होते ही सेब के बागीचों में बागवानों ने कार्य शुरू कर दिया है। बर्फबारी होने से पहले बागीचों का कार्य निपटाना आवश्यक रहता है। बागवान इन दिनों सेब की काट छांट व तौलिये बनाने के कार्य में जुटे हैं। सूखे के चलते पौधे के चारों ओर खोद कर तौलिया बनाना मुश्किल हो गया है। तौलिये बनाने के लिए यह सबसे उपयुक्त समय चल रहा है। लेकिन सूखे के कारण मुश्किल हो रही है। सर्दियों में तौलिये बनाने के साथ-साथ बागवान पौधों की जड़ों को साफ करने का कार्य भी करते हैं, ताकि पौधों की जड़ों को बोरर कीट से बचाया जा सके। इसी कारण कई बागवान सूखे में ही सख्त मिट्टी को खोदकर तौलिये बनाने का कार्य कर रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञ वर्षा के बाद नमी होने पर तौलिये बनाने व जड़ों को साफ करने की सलाह दे रहे हैं।
बारिश का करें इंतजार : आगर दास
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. आगर दास ने बताया कि तोलिये बनाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। लेकिन भूमि में पर्याप्त नमी न होने के कारण तौलिये बनाने का काम मुश्किल है। सूखे में तौलिये बनाने से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में बागवानों को बारिश का इंतजार करना चाहिए। भूमि में नमी होने के बाद ही तौलिये बनाने का कार्य करें।