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शिलान्यास किया, बजट मिला, पर बस स्टैंड नहीं बना

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कोटखाई (रोहड़ू)।
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कोटखाई तहसील में बस स्टैंड निर्माण की योजना लटकी हुई है। शिलान्यास के पांच वर्ष बीत जानेे के बाद भी बस स्टैंड निर्माण के नाम पर एक पत्थर भी नहीं लगाया गया। बस स्टैंड का कार्य शुरू न होने का मामला आजकल चुनावों में उठ रहा है। लोग भाजपा और कांग्रेस दोनों से इस पर जवाब मांग रही है। 24 पंचायतों के 30 हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित करने के लिए कोटखाई में बस स्टैंड निर्माण की आधारशिला वर्ष 2012 में तत्कालीन बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने रखी थी।
बस स्टैंड निर्माण के लिए 3.87 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया। बस स्टैंड के लिए स्थान का चयन कर फारेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया वर्ष 2012 में ही निपटा दी गई थी। फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने के बाद मौके पर 14 देवदार के पेेड़ों को काटा गया। सत्ता परिवर्तन के बाद बस स्टैंड निर्माण की योजना अधर में लटक गई। निर्माण कार्य शुरू करने के नाम पर चयनित स्थान पर एक पत्थर भी नहीं लगाया गया। चयनित स्थल पर झाड़ियां ही झाड़ियां उग गई हैं। बस स्टैंड निर्माण की योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई है। परिवहन निगम के पास कोटखाई में बसों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। पिकअप, टैक्सी व निजी वाहन बसों के साथ ही कोटखाई बाजार के बीचों बीच खड़े हो रहे हैं। इससे बाजार में कई घटों जाम लगा रहता है। जाम के कारण बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहे। बस स्टैंड बन जाता तो वाहनों को पार्किंग के लिए जगह मिल सकती थी।
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जाम की समस्या
पुड़ग गांव के राजेंद्र भरोटा ने बताया कि कोटखाई में बस स्टैंड होना आवश्यक है। कोटखाई में एक ही स्थान पर बसें, टैक्सियां, पिकअप व निजी वाहन खड़े रहते हैं। इससे जाम लगा रहता है।

कार्य लटकने ठीक नहीं
कुंदली गांव के प्रमोद जस्टा ने बताया कि बस स्टैंड का निर्माण पांच वर्षों में पूरा होना चाहिए था। इससे क्षेत्रवासियों को सुविधा होती। विकास कार्यों को अधर में लटकाना सही नहीं है।

समस्या हो जाती दूर
पुजैली गांव के चांद लाल शर्मा ने बताया कि बस स्टैंड निर्माण से कोटखाई बाजार में ट्रैफिक की समस्या दूर हो सकती थी। कई घंटों तक जाम में फंसने से लोगों को निजात मिल जाती।

निर्माण होना जरूरी
पांदली गांव के मुकेश चौहान ने बताया कि कोटखाई में बस अड्डे की जरूरत लंबे समय से है। शिलान्यास व बजट की व्यवस्था के बाद निर्माण कार्य भी शुरू किया जाना चाहिए था।

मौके पर काटे 14 देवदार पेड़ : श्यामानंद
वन परिक्षेत्र अधिकारी श्यामानंद ने बताया कि बस स्टैंड निर्माण के लिए चयनित स्थल की क्लीयरेंस वर्ष 2012 में ही दे दी गई थी। मौके पर 14 देवदार के पेड़ों को भी काटा गया था। उधर, लोक निर्माण के सहायक अभियंता अखिल चौहान ने बताया कि परिवहन निगम ने बस स्टैंड निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था। जिसके लिए उन्हें फारेस्ट क्लीयरेंस भी दे दी गई थी।
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फाइलें देखनी पड़ेगी : संगरोली
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक जेसी संगरोली ने बताया कि बस स्टैंड निर्माण की प्रक्रिया क्यों आगे नहीं बढ़ी इसकी जानकारी फाइलों को देखकर ही मिल सकेगी।
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