रिकांगपिओ(किन्नौर)। चिलगोजा के व्यापारी इस बार दाम कम मिलने से चिंतित है। इस बार मेले में किन्नौर जिले में चिलगोजा का उत्पादन कम होने से मार्केट में मात्रा 7 क्विंटल चिलगोजा पहुंचा है।
चिलगोजा का दाम पिछले साल 1300 से लेकर 1500 तक पहुंचा था, लेकिन इस बार खरीदारी कम होने से 1020 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। चिलगोजा में मेहतन ज्यादा और दाम कम मिलने से क्षेत्र के व्यापरियों को चिंता सता रही है कि आने समय में यह दाम और कम न हो जाए। चिलगोजा पूरे देश में पांगी-भरमौर और किन्नौर में ही होता है। इसके अलावा विदेशों में अफगानिस्तान और बलूचिस्तान में भी पाया जाता है। चिलगौजा समुद्रतल से 2000 फीट की ऊंचाई में पाया जाता है। चिलगोजा, चीड़ या सनोबर जाति के पेड़ों का छोटा लंबोतरा फल होता है, जिसके अंदर मीठी और स्वादिष्ट गिरी होती है और इसलिए इसकी गिनती मेवों में होती है। आयुर्वेदिक दवाओं में इसकी खूब प्रयोग होता है। चिलगोजा को एक पौष्टिक आहार भी माना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम पाइंस जिराडियाना है।
व्यापारियों का कहना है कि इसका स्वाद किसी भी अन्य कच्ची गिरी से तो मिलता ही है, मगर काफी अलग तरह का होता है। मूंगफली या बादाम से तो यह बहुत भिन्न होता है।
व्यापारियों में संजीव कुमार नेगी गांव कोठी, हुकम सिंह, ठेकेदार ललित कुमार पदम सिंह शर्मा, अश्वनी कुमार, बंसत राम नेगी, भीमसेन ने बताया कि पिछले वर्ष किन्नौर महोत्सव के दौरान चिलगोजा का मूल्य 1300 से 1500 रुपये तक था मगर इस साल 1020 रुपये प्रति किलो बाजार में बिक रहा है। मौसम की बेरुखी के कारण इस साल न्यौजा का फसल भी कम हुआ है। इस साल मूल्य कम होने के कारण अभी तक बागवान चिलगोजा को बाजार में लाने के लिए हिचकिचा रहे हैं। चिलगोजा किन्नौर के गांव कोठी, युवारंगी, रिस्पा, लिप्पा, कल्पा, मूरंग, ठंगी, जंगी, पांगी, पोवारी, तेलंगी में पाया जाता है।