छितकुल में नकदी फसलें बर्बाद
बारिश होने से घाटी के किसानों को करीब 25 लाख की चपत
मटर-आलू की फसल को हुए नुकसान का आकलन करना शेष
अमर उजाला ब्यूरो
रिकांगपिओ (किन्नौर)। भारत- तिब्बत सीमा से सटे अंतिम गांव छितकुल में इन दिनों मौसम खराब होने से किसानों की नकदी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा और नुकसान का आकलन करवाया। किसानों को लगभग 25 लाख का नुकसान हुआ है। खराब हुई फसलों में जौ, फाफरा, मटर और आलू शामिल हैं।
राजस्व विभाग की ओर से सांगला तहसील के फील्ड कानूनगो और पटवारी ने छितकुल गांव में बारिश से विभिन्न फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया। फील्ड कानूनगो राजेंद्र सिंह के अनुसार अब तक उपमहाल छितकुल और मुजलंग में फाफरा की फसल खराब होने से किसानों को करीब 25 लाख का नुकसान हुआ है। अभी नुकसान का आंकड़ा ज्यादा भी हो सकता है। इलाके में करीब 29 हेक्टेयर जमीन पर फसलें बिजी गई हैं। अभी मटर और आलू की फसल को हुए नुकसान का आंकलन करना शेष है।
छितकुल ग्राम पंचायत के उपप्रधान अरविंद नेगी, मोहन सिंह नेगी, मदन सिंह नेगी और सुख चैन के अनुसार बीत रात को अचानक मौसम खराब होने से इलाके में नकदी फसल पूरी तरह से खराब हो गई हैं। छितकुल में साल में एक ही फसल की खेती होती है और साल भर का कमाई मौसम की बेरुखी के कारण एक ही रात में बर्बाद हो गई है। छितकुल के किसानों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए। इस संबंध में पटवारी दीप नेगी के अनुसार छितकुल में मौसम खराब होने के कारण नकदी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। विभाग ने नुकसान का आंकलन करके रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी है। करीब 25 लाख का नुकसान किसानों को हुआ है। कल्पा खंड के एसडीएम डॉ. अवनिंद्र कुमार के अनुसार छितकुल में फसलों को हुए नुकसान के लिए राजस्व विभाग को जल्द से जल्द आकलन करने के लिए कहा गया है। जिससे किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके।