अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
रामपुर उपमंडल की किन्नू पंचायत के तहत निर्माणाधीन विद्युत परियोजना की मनमानी से ग्रामीण रुष्ट हैं। परियोजना की मनमानी की शिकायत ग्रामीणों ने कई बार जिला और स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा की मांग उठाई, लेकिन एक वर्ष से ग्रामीणों को मात्र आश्वासन ही मिल पाए हैं।
किन्नू पंचायत के भगावाट गांव के प्रभावित डेविड, दीवान सिंह, श्याम सिंह, पुष्पा देवी, शीला देवी, कर्मदासी, शमशेर सिंह, मनोहर दास ने कहा कि निर्माणाधीन परियोजना प्रबंधन ने उसकी जमीन पर बिना किसी एग्रीमेंट और स्वीकृति से कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं प्रोजेक्ट प्रबंधन की ओर से विस्थापितों को नौकरी और मुआवजा राशि देने वादा भी पूरा नहीं किया जा रहा है। डेविड का कहना है कि जब वह इस बात को लेकर प्रबंधन से बातचीत करते हैं तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट प्रबंधन ने नौकरी देना तो दूर अभी तक कब्जे में ली जमीन का मुआवजा तक नहीं दिया है। इसके लिए वह एक वर्ष से पत्राचार कर रहा है। लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने मांगें नहीं माने जाने पर प्रधानमंत्री, राज्यपाल और एसडीएम को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट की मनमानी का आरोप जड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट का कार्य प्रगति पर है, लेकिन प्रबंधन के मुताबिक प्रोजेक्ट का काम रुका है। डेविड ने कहा कि हमें अपनी भी भूमि से प्रोजेक्ट प्रबंधन ने बेदखल किया है, जबकि प्रोजेक्ट निर्माण में साफ प्रावधान है कि जिस भी व्यक्ति की जमीन प्रोजेक्ट निर्माण में जाती है उसे पहले मुआवजा दिया जाता है, लेकिन यहां पर हर नियम को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट प्रबंधन ने कुछ स्थानीय लोगों को रखा है, जो उन्हें लगातार डरा रहे हैं। इस बारे में उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दर्ज की है, लेकिन पुलिस की तरफ से भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने जिला प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से प्रभावितों की मांग जल्द पूरा करने की मांग उठाई है।
इस बारे में पंचायत प्रधान यशपाल चौहान ने कहा कि भगावाट गांव के प्रभावित की मांगें जायज हैं। उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रभावित लोगों को पुलिस सुरक्षा भी मुहैया करवाई जानी चाहिए।
एसडीएम रामपुर डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि निजी विद्युत परियोजना के संबंध में शिकायत आई है। इसकी जांच के लिए मामला राजस्व विभाग को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को यदि डराया-धमकाया जा रहा है तो वे पुलिस की सहायता ले सकते हैं।