ज्यूरी (रामपुर बुशहर)।
बुधवार रात काओबिल क्षेत्र में हुए सड़क हादसे से तीन बच्चों के सिर से पिता का साया छिन गया। हादसे का शिकार हुए दिनेश और स्वर्ण अपने पीछे बूढ़े मां बाप, बच्चों और पत्नियों को अकेला छोड़ गए हैं। आठ किलोमीटर की इस सड़क पर यदि पैरापिट या क्रैश बैरियर लगाए होते तो इन युवकों की जान बच सकती थी। हादसे के बाद समूचे काओबिल क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। मृतकों के परिजनों की चीख पुकारों से काओबिल क्षेत्र गमगीन बना हुआ है।
गौरतलब है कि काओबिल सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत से पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया है। दुर्घटना में मरने वाले तीन युवकों की उम्र 27 से 34 साल के बीच थी। कोट गांव के 27 वर्षीय दिनेश की मौत से परिवार का इकलौता सहारा भी छिन गया है। दिनेश ने अपने पीछे दो बच्चे, पत्नी और दो बूढ़े मां-बाप को बेसहारा छोड़ दिया है। वहीं, सदाना गांव के 34 वर्षीय स्वर्ण की मौत से उसकी एक बच्ची और पत्नी के सिर से पति का साया उठने से उन पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दिनेश और स्वर्ण की मौत के बाद तीन छोटे-छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं, वहीं उनकी पत्नियां भी भरी जवानी में विधवा हो गईं। उल्लेखनीय है कि लोक निर्माण विभाग की गानवीं से कोटी काओबिल करीब आठ किलोमीटर लंबी सड़क की भले ही टारिंग हो चुकी हो, लेकिन इस सड़क में सुरक्षा के लिहाज से एक भी पैरापिट नहीं लगाया गया है। जिस जगह यह हादसा पेश आया वहां पर सड़क तंग होने के साथ-साथ यहां क्रैश बैरियर की भी कोई सुविधा नहीं है। पूरी सड़क में यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलिंग बीम या पैरापिट न होने से बीते तीन वर्षों में कई वाहन सड़क से नीचे जा गिरे हैं और इन हादसों में आठ लोगों की जान जा चुकी है।