अमर उजाला ब्यूरो
नेरवा
कई बडे़ हादसों के बाद भी लाल ढांक-पांवटा-रोहड़ू राष्ट्रीय राजमार्ग की दशा नहीं सुधारी गई है। मिनस पुल से फेडिज पुल तक अठारह किलोमीटर लंबी सड़क में करीब डेढ़ सौ लोग दुर्घटनाओं में जान गंवा चुके हैं। लगातार हादसों के बाद कोई भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है।
आठ सालों से सड़क की बदहाली से लोग परेशान हैं। सड़क पूरी तरह टूटी है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण गाड़ियां भी खराब हो रहे हैं। अठारह किलोमीटर सड़क पर सफर करने में करीब एक घंटा लग रहा है। इतने हादसे होने बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। फेडिज पुल से मीनस पुल तक कहीं भी कोई क्रैश बैरियर या पैरापिट नहीं है। छह महीने पहले निजी बस हादसे में भी 45 लोगों को मौत हो गई थी। छह माह से भी अधिक समय बीत जाने के बावजूद ब्लैक स्पॉट पर कोई पैरापिट या क्रैश बैरियर नहीं बनाए गए हैं।
सात आठ सालों में हर तीसरे मोड़ पर दुर्घटना के बाद झंडे लगे है। सैकड़ों लोग अपंग हो चुके हैं। एक ही मार्ग पर इतने हादसे होने के बावजूद सरकार की चुप्पी को लेकर लोग सवाल खडे़ कर रहे है। क्षेत्र के लोग मुख्यमंत्री से लेकर जन प्रतिनिधियों तक सड़क की दशा को सुधारने का आग्रह का चुके। लेकिन अभी तक सड़क पर एक भी गड्ढे को नहीं भरा गया। पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की कि सड़क को दुरुस्त किया जाए।