हिमाचल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की विजय के बाद अब सरकार बनाने की जद्दोजहद तेज हो गई है। इसके साथ ही अब मुख्यमंत्री पद के लिए भी रस्साकशी शुरू हो गई है। वीरभद्र सिंह को ही भावी मुख्यमंत्री माना जा रहा है, मगर उनके विरोधी नेता भी इस बीच गुपचुप सक्रिय हैं। विधायक दल की मीटिंग शुक्रवार या शनिवार को हो सकती है। हालांकि, इस बैठक के स्थल को लेकर अभी तक संशय बरकरार है।
पार्टी आलाकमान ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वीरभद्र सिंह के अनुसार यह मीटिंग शुक्रवार अथवा शनिवार को होगी। बैठक शिमला में ही होगी। हालांकि, कुछ नेताओं का एक धड़ा यह भी कह रहा है कि यह बैठक नई दिल्ली में भी हो सकती है। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम पर सोनिया गांधी ही मुहर लगाएंगी। इसके साथ ही वीरभद्र सिंह के निवास स्थान हाली लॉज में भी कांग्रेस के विजयी विधायकों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
बड़े जिलों ने बनाई कांग्रेस की सरकार
हिमाचल में सत्ता परिवर्तन पर राज्य के बड़े जिलों ने मुहर लगाई। कांगड़ा, शिमला और मंडी जिलों से कांग्रेस को कुल 21 सीटें मिलीं। इनमें सबसे बड़े 15 सीटों वाले कांगड़ा में कांग्रेस को 10, भाजपा को 3, शिमला में कांग्रेस को 6, भाजपा को 1 और मंडी में कांग्रेस और भाजपा को 5-5 सीटें मिलीं। इन जिलों में कांग्रेस की बढ़त को भाजपा नहीं रोक सकी।
केवल मंडी ने दोबारा भेजे कैबिनेट मंत्री
सरकार के 10 में से 4 कैबिनेट मंत्री चुनाव हार गए। केवल मंडी जिला ने अपने सभी तीन मंत्रियों गुलाब सिंह, जयराम और महेंद्र सिंह को दोबारा भेजा। इसी कारण इस जिला में मुकाबला बराबरी पर छूटा। कांगड़ा में चार में से दो और कुल्लू में एक मंत्री चुनाव हार गए।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष वीरभद्र सिंह ने कहा कि जनता के प्रेम ने ही कांग्रेस को जीत दिलाई है। बुरे एवं भ्रष्ट प्रशासन की वजह से ही भाजपा को बुरी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस ने आज तक हिमाचल के विकास में बड़ा योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने विधानसभा चुनाव में मिली हार को हैरत भरा बताते हुए कहा कि इतना काम करने के बाद उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी। पिछले पांच साल में भाजपा की सरकार ने आम आदमी के हित में काम किया और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन दिया।