जिस भू-सुधार कानून के कारण गैर कृषकों के हिमाचल में जमीन खरीदने पर रोक है, उसी कानून की धारा 118 के कारण जमीन धड़ल्ले से गैर हिमाचलियों के हाथों बेची जा रही है।
इस धारा के तहत ही प्रियंका वाड्रा, प्रशांत भूषण जैसे कई नामी लोगों ने हिमाचल में जमीनें खरीदी हैं।
राजस्व मंत्री कौल सिंह ने बताया है कि पिछले तीन साल में धारा 118 के उल्लंघन के 246 केस दर्ज हैं। इनमें से 110 निपटाए जा चुके हैं, जबकि 136 अभी लंबित हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों यानी 2010 से 2012 तक कुल 881 मामलों में जमीन खरीद की मंजूरी दी गई। इनमें सबसे ज्यादा 416 मामले 2010 में निपटाए गए।
2011 में 145 और 2012 में 320 मामलों में गैर कृषकों को भूमि खरीद की मंजूरी दी गई।
राजस्व मंत्री ने विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में यह तथ्य प्रस्तुत किए।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश टैनेंस एंड लैंड रिफार्म एक्ट 1972 के तहत राज्य में गैर कृषकों के लिए निजी भूमि खरीद पर रोक है।
इसलिए इस प्रकार के मामलों में केवल राज्य सरकार ही धारा 118 में कुछ नरमी बरत सकती है। लेकिन चिंता की बात ये है कि जमीन तेजी से गैर हिमाचलियों के हाथों में जा रही है।
दरअसल हिमाचल में अधिकांश आबादी कृषक श्रेणी में है। इसलिए अमूमन प्रदेश से बाहरी व्यक्ति ही धारा 118 के तहत आवेदन करते हैं।
बेनामी सौदे जांच आयोग ने धारा 118 को और कड़ा करने को कहा था, लेकिन इसकी सिफारिशों को कांग्रेस सरकार ने अभी स्वीकार नहीं किया है।
प्रियंका गांधी, प्रशांत भूषण जैसे कई नाम
धारा 118 की अनुमति के लिए पूर्व सरकार के समय गाइडलाइंस में संशोधन हुआ था, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे। इस सूची में प्रियंका गांधी, प्रशांत भूषण जैसे कई नामी लोग भी शामिल हैं।
उद्योग, शिक्षण संस्थान और निजी आवास के लिए अधिकांश मंजूरियां हैं। साल दर साल इस धारा के तहत आवेदन बढ़ रहे हैं।
क्यों खत्म होनी चाहिए धारा 118?
बेनामी सौदों की जांच के लिए बने जस्टिस सूद कमीशन ने कहा था कि धारा 118 का मूल मकसद कृषि भूमि को बचाना था। राज्य में 85 फीसदी जमीन पर जंगल एवं घासनियां हैं।
शेष 15 फीसदी में भी बहुत सा क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण कृषि योग्य नहीं है। इसी पर 80 फीसदी आबादी खेती-बाड़ी के लिए निर्भर है। लेकिन अब पैसे वाले लोग गैर कृषि गतिविधियों के लिए जमीन खरीद रहे हैं।