महकमे का तर्क है कि जब से निशुल्क टेस्ट की सुविधा शुरू की गई है। लोग हर महीने या तीन महीने बाद पूरे शरीर के टेस्ट करा रहे हैं। इससे प्रदेश सरकार पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है। प्रयोगशालाओं में भी टेस्ट रिपोर्ट लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। हिमाचल में इस समय 130 के करीब निशुल्क टेस्ट किए जा रहे हैं।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में आउटडोर पेशेंट के लिए ईसीजी और अल्ट्रासाउंड के पैसे लेने शुरू कर दिए गए हैं। अब निशुल्क टेस्ट बंद करने पर सरकार विचार कर रही है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में लोगों के लिए अस्पतालों में निशुल्क टेस्ट सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। मेडिकल काॅलेजों के अलावा सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में निजी कंपनी की लैब स्थापित की गई हैं। इन प्रयोगशालाओं में मरीजों के निशुल्क टेस्ट किए जाते हैं, लेकिन इन टेस्टों का खर्च सरकार को वहन करना होता है। हर साल प्रदेश सरकार कंपनी को टेस्ट के करोड़ों के बिलों की अदायगी करती है।