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राजनीति: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, जानें क्या कहा

Thu, 24 Sep 2026 08:13 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठना देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। विनय कुमार ने आरोप लगाया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में दो सदस्यों की असहमति के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त की सहमति से लिए गए फैसलों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं के मताधिकार प्रभावित होने की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के कारण करीब 13 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हुए हैं। विनय कुमार ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डाटा के केंद्रीयकरण और पश्चिम बंगाल में अपील की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियां महत्वपूर्ण हैं।

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उन्होंने गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और करीब चार महीने तक चुनाव आयोग की बैठक नहीं होने संबंधी खबरों पर भी स्पष्टीकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर उठाए गए सवालों को नजरअंदाज किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी समय-समय पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। विनय कुमार ने कहा कि इन आरोपों और आपत्तियों पर चुनाव आयोग को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता में जनता का विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान से जुड़े गंभीर सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए।

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प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ख्याल रखें रजनी पाटिल: राकेश
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर से विधायक राकेश जम्वाल ने सोलन में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि रजनी पाटिल की टिप्पणी कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और वैचारिक दीवालियेपन का प्रमाण है। उन्होंने पाटिल को राजनीतिक मर्यादा में रहकर बयानबाजी करने की सलाह भी दी और कहा कि जब कांग्रेस के पास मोदी सरकार की उपलब्धियों का जवाब देने के लिए तथ्य नहीं बचे तो उसके नेता भाषा की मर्यादा की धज्जियां उड़ाने लगे हैं। गुरुवार को जारी बयान में राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी को यह याद रखना चाहिए कि नरेंद्र मोदी केवल भाजपा के नेता नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी अमर्यादित टिप्पणी करोड़ों देशवासियों के जनादेश का अपमान है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा को राजनीतिक बहस का स्तर नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें पीएम मोदी के खिलाफ भैंस का अवतार जैसे शब्द खोजने से पहले यह देखना चाहिए कि जनता ने कांग्रेस की राजनीति को किन कारणों से लगातार नकारा है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के पास अपने शासन और वादों का हिसाब देने के लिए ठोस जवाब नहीं है, उसके नेता दूसरों पर कीचड़ उछालकर शायद अपनी राजनीतिक असफलताओं को ढकना चाहते हैं। राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करनी है तो तथ्यों पर करे। लेकिन अफसोस की बात है कि कांग्रेस नेताओं के पास आलोचना के लिए कोई मुद्दा नहीं हैं और सुर्खियों में बने रहने के लिए ओछी हरकतें कर खुद ही हंसी के पात्र बन रहे हैं। राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी को सोलन में राजनीतिक नौटंकी करने से पहले अपनी ही सरकार से पूछना चाहिए कि चुनावी गारंटियों का क्या हुआ।
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