भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने 212.94 करोड़ रुपये 46,048.77 हेक्टेयर क्षेत्र और 1,200 जलस्रोतों को जलस्रोत विकास के लिए आवंटित किया है। जिसमें पारंपरिक जलस्रोत परियोजनाओं के लिए 128.94 करोड़ रुपये और जलस्रोत विकास के लिए 84 करोड़ रुपये पर खर्च होंगे। ग्रामीण विकास विभाग ने हर जिला से संबंधित विकास खंडों से गांव और पंचायत में झरनों को विकसित करने के लिए क्षेत्र के आधार पर ब्योरा मांगा है। प्राकृतिक जल स्रोतों की अनुमानित रिपोर्ट के बाद योजना का धरातल पर संचालन होगा। अभी सितंबर 2026 तक प्रदेश में इस योजना का कार्य विस्तार के रूप में किया जा रहा है और इसके साथ ही इस योजना के 3.0 के ड्राफ्ट को भी अंतिम रूप प्रदान कर दिया जाएगा।
बिलासपुर के विकास खंड श्री नयना देवी में 23, चंबा के विकास खंड भाटियात 18, हमीरपुर के विकास खंड नादौन 57, हमीरपुर के विकास खंड हमीरपुर 44, हमीरपुर के विकास खंड सुजानपुर टिहरा में 122, कांगड़ा के विकास खंड बड़ोह में 52, विकास खंड धर्मशाला में 11, विकास खंड कांगड़ा में 53, विकास खंड नगरोटा सूरियां में 23, विकास खंड नूरपुर में 13, विकास खंड पालमपुर में 33, विकास खंड पंचरुखी में 13, विकास खंड सुरानी में 66, विकास खंड देहरा में 24, लाहौल और स्पीति के विकास खंड स्पीति में 5, कुल्लू के विकास खंड भुंतर में 37, मंडी के विकास खंड धनोटू में 35, विकास खंड गोपालपुर में 120, विकास खंड निहरी में 61, शिमला के विकास खंड चौपाल में 43, विकास खंड जुब्बल में 65, विकास खंड कोटखाई में 5, विकास खंड कुपवी में 15, विकास खंड ननखड़ी में 23, विकास खंड टुटू में 56 विकास खंड रोहड़ू में 46, विकास खंड मशोबरा में 54, सिरमौर के विकास खंड टिल्लोरधार में 37, विकास खंड दादहू में 46 और जिला ऊना के विकास खंड हरोली में एक समेत कुल 1200 स्प्रिंगशेड प्रबंधन के लिए प्रस्तावित झरने हैं।
जिला विकास अधिकारी ऊना रमनदीप चौहान ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक एवं परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राघव शर्मा के दिशानिर्देशों के तहत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का ड्राफ्ट तैयार कर दिया है। जिसमें 10 जिलों के 27 विकास खंड में इसका संचालन होगा।