यह व्यवस्था केवल प्लॉट की खरीद-बिक्री के मामलों पर लागू होगी। सरकार का मानना है कि बिना नियोजन के छोटे-छोटे प्लॉट बेचने से बाद में भवन निर्माण के दौरान लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में प्लॉट तक पहुंचने का रास्ता नहीं होता, जबकि कहीं सड़क, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहता है। ऐसे मामलों में टीसीपी विभाग भवन निर्माण के नक्शे स्वीकृत नहीं कर पाता, जिससे खरीदारों को आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्लॉट खरीदने वालों को भवन निर्माण की अनुमति लेने में आसानी होगी। टीसीपी विभाग पहले ही यह सुनिश्चित करेगा कि संबंधित भूमि नियमानुसार विकसित की गई है और सभी आवश्यक मानकों का पालन किया गया है। इससे अवैध प्लॉटिंग और अनियोजित निर्माण पर भी प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य आम लोगों के हितों की रक्षा करना और टीसीपी क्षेत्रों में सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना है। विभाग इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने में जुटा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद टीसीपी क्षेत्रों में प्लॉट की खरीद-बिक्री अधिक पारदर्शी होगी और भविष्य में भवन निर्माण से जुड़े विवादों में भी कमी आने की संभावना है।
अब जमीन का विभाजन (सब-डिवीजन) कराने के साथ बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर ही प्लॉट की रजिस्ट्री करने का प्रस्ताव है। लोगों की सहूलियत को देखते हुए यह मामला राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी से उठाया गया है। जल्द इसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा। -राजेश धर्माणी, टीसीपी मंत्री, हिमाचल सरकार